31 लीटर दूध और केसर से किया भगवान शिव का अभिषेक और हवन में दी आहुतियां

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सीहोर। शहर के सीवन तट पर हनुमान मंदिर गोपालधाम में शिव प्रदोष सेवा समिति के तत्वाधान में एक माह तक आयोजित होने वाले शिव शक्ति दिव्य अनुष्ठान वैशाख महापर्व का आयोजन किया जा रहा है। पूरे वैशाख के माह में आधा दर्जन से अधिक विप्रजनों के द्वारा 21 लाख महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाएगा। सोमवार को यज्ञाचार्य पंडित पवन व्यास, पंडित कुणाल व्यास और समिति के मनोज दीक्षित मामा के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने सुबह भगवान शिव का 31 लीटर दूध और केसर से अभिषेक किया। वहीं दोपहर में गायत्री मंत्रों के साथ आहुतियां दी। दिव्य अनुष्ठान के दौरान यहां पर मां बगलामुखी की जयंती मनाई गई।
बगलामुखी देवी जन्म उत्सव के बारे में वर्णन करते हुए पंडित श्री व्यास ने बताया कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी जन्म उत्सव मनाया जाता है। इस साल यह पावन तिथि है। मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं और उन्हें शत्रु नाशक, विजय प्रदायिनी तथा नकारात्मक ऊर्जा का विनाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मां की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है। मां बगलामुखी को पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है। वे शक्ति और तेज का स्वरूप हैं और अपने भक्तों को हर तरह की बाधाओं और संकटों से रक्षा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि मां बगलामुखी की उपासना से वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति अपने शब्दों से दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। जिस समय भगवती असुर का संघार करने के लिए क्रोधित हुईं तब उसने भगवती  के क्रोध को जान कर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रूद्र, और शदाशिव का पंच-अस्त्रों के रूप में आह्वान किया। तब भगवती भयानक रूप धारण कर आसुरी बगला के रूप में प्रकट हुयीं और पंच-अस्त्रों-ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रूद्र, और शदाशिव-को पकड़ कर अपना कमला आसन बना कर बैठ गयी। समय अन्तराल में इन्हीं पंच-अस्त्रों के कमला आसन को पंच-प्रेत आसन की संज्ञा दे गयी। इसी आसन पर विराजमान होकर महादेवी ने कलल नामक असुर की जिह्वा पकड़ बज्र से एक ही प्रहार कर सघारं कर दिया। उस समय स्वयं ही असुर की समस्त शक्तियों को छीनकर आसुरी रूप में प्रकट हो भगवती असुर मार पंच-प्रेत आसन बाली भगवती आसुरी बगलामुखी कहलाई।

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