भर्ती में जानबूझ कर की जाती है लेटलतीफी, बचे हुए कर्मचारियों पर लादा जा रहा काम का बोझ
हर माह कम हो रहे कर्मचारी लगातार होते जा रहे सेवानिवृत्त
नर्मदापुरम। सेवानिवृत्ति एक शासकीय प्रक्रिया है। जिसके चलते हर माह की आखरी तारीख आने पर शासकीय विभागों में किसी न किसी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हो रही है। यह क्रम लगातार जारी है। शासकीय विभागों के पास वैसे ही कर्मचारियों का टोटा है। इसके बाद हर माह और कम होेते जा रहे हैं। 30 अप्रैल से पूर्व ही कलेक्ट्रेट, नपा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, सहित अनेक विभाग में एक दर्जन से अधिक शिक्षक व अन्य विभागों में दो दर्जन से अधिक स्टाफ की सेवानिवृत्ति हो गई। जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। इसी प्रकार शासकीय प्राथमिक शाला से चार शिक्षकों की सेवानिवृत्ति हो गई, नपा के तीन हो कर्मचारी रिटायर हो गए। जिससे उनके स्थान रिक्त हो गए। वन विभाग, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों में दर्जनों कर्मचारियों का महिने की आखरी तारीख को अवकाश होने के कारण एक दिन पूर्व ही विदाई समारोह किया गया। उन्हें उनके कार्यकाल में दी गई सेवाओं के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
हर विभागों में खाली पड़े हैं पद
शासन के प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं लेकिन व्यापंम के समान वाली परीक्षा एजेंसियों के द्वारा बेरोजगारों को रोजगार देने के नाम पर बड़े शहरों में परीक्षाएं ली जा रहीे हैं। केंद्र व राज्य शासन की परीक्षाओं में तमाम विसंगतियां बनी हुई हैं। जिससे बेरोजगार खासे परेशान हैं।
62 में हो रहे सेवानिवृत्त
शासकीय कर्मचारियों की आयु 62 वर्ष पूरी होने पर उन्हें विभाग की ओर से पुष्पमाला पहनाकर विदाई दी गई। अपने जीवन के अनुभव से कनिष्ठों को लाभांवित करना चाहिए। समारोह में अनेक अधिकारी सहित स्टाफ के कर्मचारी और परिचित माैजूद रहे।
60 से अधिक आयु नहीं होना चाहिए
अनेक सेवानिवृत हुए कर्मचारियों का कहना है कि शासन स्तर से जो आयु 60 से बड़ाकर 62 की है यह गलत कदम है। सेवानिवृत्ती की उम्र नहीं बढ़ानी चाहिए नए युवकों को सेवा का मौका दिया जाना चाहिए जिससे वे पूरे जोश के साथ कार्य कर सकें। शासन के द्वारा आयु 60 से बढ़ाकर 62 करने का रवैया किसी भी तरह से ठीक नहीं है।
युवाओं में आक्रोश
युवा पढ़ाई लिखाई के बाद रोजगार की तलाश में रहते हैं परीक्षाएं भी देते हैं लेकिन परीक्षा लेकर उसके परिणाम के लिए महिनों लगा दिए जाते हैं। यह जानबूझकर किया जाता है। इस बात को लेकर बेरोजगारों में आक्राेश पनप रहा है। लेकिन वे मजबूर हो जाते हैं।







