खाद्यान्य, सब्जी के बाद तरबूज की मंडी में भी अव्वल हो रहा नर्मदापुरम
नर्मदापुरम। नर्मदांचल की उर्वरा माटी में खाद्यान्य,सब्जी के बाद तरबूज की फसल भी बंपर आ रही है। क्षेत्र के खेतों में लगे तरबूजों से पिकप भराकर आ रही है। जिसकी नीलामी सुबह कृषि उपज मंडी के सब्जी मंडी वाले क्षेत्र में हो रही है। मंडी वाले हर दिन करीब 25-18 पिकप में तरबूज भराकर आ रहे जिसमें करीब 500 क्विंटल तरबूज की थोक में बिक्री होती है। आने वाले दिनों में और ज्यादा मात्रा में तरबूज आने की संभावना बन रही है। इससे किसानों की स्थिति भी मजबूत हो रही है।
फलोत्पादन की और रूझान
नर्मदांचल में अब परंपरागत खेती से हटकर फलों के उत्पादन की ओर भी किसानों का रूझान तेजी से बढ़ता जा रहा है। पहले नर्मदा और तवा के तरबूज, खरबूज, ककड़ी बड़ी मात्रा में आते थे। लेकिन अब डंगरबाड़ियों में फलों की जगह सब्जियों ने ली है। सब्जी की पैदावार भी हजारों क्विंटलों में हो रही है।
रेत की बजाय खेतों में तरबूज की खेती
नर्मदा और तवा की रेत की बजाए खेतों में तरबूज की खेती हो रही हैं। इससे तरबूज का उत्पादन तेजी से बढ़ गया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही बाजार में इसकी मांग भी खासी बढ़ गई है। पिछले कुछ दिन से मंडी में लगातार तरबूज की खेप आ रही है। पिकप में छोटे व्यापारी या किसान तरबूज की फसल लेकर आ रहे हैं।
ढाई घंटे में लाखों की बिक्री
कृषि मंडी में अनाज, सब्जी के बाद तरबूज के वाहनों के खडे होने के लिए पर्याप्त जगह है। बेचने और खरीदने वाले सुबह 9 बजे से मंडी में पहुंच जाते हैं। दो से ढ़ाई घंटे में लाखों रुपये के तरबूजों की थोक में बिक्री हाे जाती है। उसके बाद जो खरीदते हैं वे अपनी दुकानें बाजार में खुले स्थान पर ढेर लगाकर 20 रुपये किलो में या फिर नग से बेच रहे हैं।
प्रदेश के कई जिलों में भी जा रही है खेप
एक अनुमान के मुताबिक औषतन तीन सौ से चार सौ क्विंटल तरबूज की बिक्री एक दिन में हो रही है। शहर में ही प्रतिदिन साढ़े चार सौ क्विंटल तरबूज की आवक हो रही है। इसके बाद यहां से आसपास के जिले में तरबूज की खेप पहुंच रही है।
व्यापारियों को मिल रहा मुनाफा
किसान तरबूज की खेती करते हैं जो थोक में किसी व्यापारी को दे देते हैं। अनेक व्यापारी खेत में ही पिकप लेकर पहुंच जाते हैं। किसान से कम दाम में लेकर व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। इन व्यापारियों द्वारा सुबह खरीदी के बाद विभिन्न शहरों में तरबूजों की खेप पहुंचाई जा रही है।
कम समय की फसल
किसानों एवं उद्यान केंद्र के अधिकारी कर्मचारियों ने बताया कि तरबूज की फसल कम समय में ही तैयार हो जाती है। इससे किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। पहले डंगरबाड़ियों में इसका सीमित उत्पादन होता था।







