सीहोर। 14 वर्षीय आदिवासी अंजली ग्राम घुटवानी, तह.भैरूंदा, जिला सीहोर निवासी ने जनसुनवाई में गुहार लगाई, उन्होने बताया कि उनके पिता कैलाश बारेला की को दिवड़ सर्प के काटने से इलाज के दौरान उनकी मृत्य दिनांक 03/06/2013 को हो गई थी, मृतक के पिता बुजुर्ग व अशिक्षित मजदूर हैं, पिता की मृत्यु के समय मुझ प्रार्थीनी की आयू 2 वर्ष एंव मेरी छोटी बहन माँ के पेट में ही थी, पिता की मृत्यु के 6 माह बाद उसका जन्म हुआ था, मेरी माँ हम दोनों मासूमों को बुजुर्ग दादाजी के पास छोडक़र किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई। तभी से आज तक हमारे दादाजी मजदूरी कर हमें जैसे-तैसे पढ़ा-लिखा रहे हैं, परन्तु अब दादा की उम्र लगभग 75 वर्ष हो गई है, जिसके कारण उनसे अब मजदूरी करने की भी नही बन पा रही है, बुजुर्ग दादाजी के अशिक्षित एंव बेसहारा होने के कारण पिताजी की मृत्यु के समय वह शासन/प्रशासन से आर्थिक सहायता नही ले सके।
दोनों बहने आगे भी पढ़ाई करना चाहती हैं, परन्तु वर्तमान में हम लोगों के समक्ष भुखे मरने की नौबत आ चुकी है। दादा जी भी बीमार रहते हैं, पैसे के अभाव में उनका ईलाज भी नही हो पा रहा है।
बच्चियों का आग्रह है कि मानवीय आधार पर हम दोनों नाबालिग, बैसाहारा को आर्थिक सहायता राशि प्रदान कराई जावे।








