सीहोर । सीहोर जिले की ग्राम पंचायत बरखेड़ादेवा स्थित तालाब के जीर्णोद्धार और गहरीकरण की मांग ग्रामीणजनों द्वारा की गई है । ज्ञातव्य है कि निर्माण उपरांत उक्त तालाब को कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायत बरखेड़ादेवा को रख रखाव एवं सख्क्षय हेतु हस्तांतरित कर दिया गया था लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा टैंक का रख-रखाव नहीं किया गया, जिससे इसके पाल एवं मोहरे टूट जाने से पानी का भराव नहीं हो पाया, जिससे तालाब निर्माण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं हुई तथा इससे कोई जनहित का लाभ प्राप्त नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त टैंक के जीणोद्धार एवं गहरीकरण हेतु सीएम हेल्पलाईन में भी शिकायत की गई थी किन्तु ग्राम पंचायत द्वारा कोई कार्य नहीं कराया गया उल्टा यह कहा कि टैंक उमेदसिंह की भूमि में कृषि विभाग द्वारा बनाया गया है इसलिए कार्य किया जाना संभव नहीं है, जबकि नाले की अपनी स्वयं की शासकीय भूमि ग्राम खाईखेड़ा के राजस्व पत्रों में सर्वे नं. 597, 598, 599, 600 कुल रकबा 3.93 एकड़ दर्ज है। फिर उमेदसिंह की भूमि में टैंक क्यों बना होगा, यह जांच का विषय है, साथ ही यह टैंक मात्र 0.400 है. क्षेत्र में बनवाया गया था। इस बारे में ग्राम पंचायत बरखेडादेवा द्वारा अपने पत्र दिनांक 9 जनवरी 2003, जो कि उपसंचालक कृषि को लिखा गया था, में उल्लेख किया गया था कि स्थान का चयन कर लिया गया है, सर्वे कराकर निर्माण कराये जाने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। वहीं अब ग्राम पंचायत का कहना है कि कृषि विभाग द्वारा टैंक उमेद सिंह की भूमि में बनाया गया है इसलिये कार्य कराया जाना संभव नहीं है, ये असत्य प्रतीत होता है, यहां उल्लेखनीय है कि उमेद सिंह को भूमि का पट्टा वर्ष 2001 में प्राप्त हो गया था तो वहीं टैंक का निर्माण वर्ष 2006 में हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम पंचायत का यह कहना है कि टैंक उमेदसिंह की भूमि में बनाया गया है, तो उमेद सिंह द्वारा निर्माण के समय कोई दावा या आपत्ति ली गई होगी अथवा अपनी भूमि में निर्माण की सहमति भी दी गई होगी, जिसके रिकार्ड का अवलोकन किया जाना अतिआवश्यक है। ग्रामीणों ने आगे कहा कि टैंक बरखेडादेवा एवं खाईखेडा के काकड़ में स्थित नाले पर बनाया गया था, जिसका सर्वे नं. का उल्लेख विभाग द्वारा नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट हो सके कि टैंक निर्माण नाले की शासकीय भूमि में हुआ था या उमेद सिंह की पट्टे की भूमि में। ग्रामीणों ने कहा कि इस बारे में उनके द्वारा श्रीमान जिलाधीश महोदय को दिनांक 24 दिसंबर 2019 को जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत कर संयुक्त टीम से जांच कराने का अनुरोध किया गया था, तदानुसार उपसंचालक कृषि एवं अन्य अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से टैक की जांच की गई थी । जांच उपरांत क्या कार्यवाही हुई, इससे अभी तक किसी को भी अवगत नहीं कराया गया। इस रिपोर्ट का अवलोकन होने के साथ ही उक्त टैंक का विभाग द्वारा वर्ष 2010-11 में जो भौतिक सत्यापन कराया गया था, उसमें पाई गई वस्तुस्थिति से संबंधित पक्षों को अवगत कराया जाना चाहिए । ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान में टैंक की पाल तोड़ी जाकर मोहरा टूटा हुआ है, टैंक की भूमि पर अतिक्रमण कर कृषि कार्य किया जा रहा है तथा शासकीय नाले की भूमि सर्वे नं. 597 598, 599 एवं 600 रकबा 3.93 एकड भूमि पर पूरी तरह अतिक्रमण हो चुका है । ग्रामीणों ने नाले की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर टैंक का गहरीकरण तथा जीणोद्धार जल गंगा सवर्धन अभियान, जनभागीदारी अथवा मनरेगा से कराए जाने की मांग जिला प्रशासन से की है ताकि टैंक में 12 माह पानी उपलब्ध हो सके और आसपास के कृषकगण लगभग 20 है. क्षेत्र में सिंचाई कर सकें और आसपास के जलस्रोत रिचार्ज हो सके तथा गर्मियों में मवेशियों को पानी उपलब्ध हो सके, जिससे आसपास के क्षेत्र में जलसंकट के समय लोगों को कुछ राहत मिल सके।








