भागवत में हर समस्या का समाधान उपलब्ध-पंडित गिरिजाशंकर तिवारी
सीहोर। कलयुग के प्रभाव से केवल भागवत कथा ही बचा सकती है, क्योंकि भागवत में हर समस्या का समाधान उपलब्ध है, आज के आधुनिक युग में भी भागवत गुण ज्यादा प्रभावी हैं, इसमें प्रकृति पर भी ज्यादा ध्यान दिया गया है। जैसे सूर्य देवता का अपना प्रभाव है, मानव सहित सभी जीव जंतुओं का पालन पोषण ज्यादातर सूर्य पर ही निर्भर है। सुबह के समय सूर्य को जल अर्पित करते समय सूर्य की किरणें जल में से होती हुई आंखों व पूरे शरीर तक पहुंचती हैं। उक्त विचार शहर के शुगर फैक्ट्री के समीपस्थ मोर गार्डन में दाने परिवार के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित गिरिजाशंकर तिवारी ने कहे। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित के सामने जब कलयुग आ गया तो उनकी बुद्धि पर सवार होने लगा, पंडित श्री तिवारी ने कहा कि कलयुग में ही सारे युग विद्यमान है। कलयुग के लक्षण आदि का विस्तार से वर्णन किया।
एक बार राजा परीक्षित अपने राज्य की शासन व्यवस्था देखने के लिए निकले। उन्होंने सबसे पहले एक गाय और बैल को आपस में बातें करते देखा। उसी समय एक काला सा व्यक्ति उसे लात मारने लगा। जिसे राजा परीक्षित छुप कर देख रहे थे। यह देख राजा परीक्षित को क्रोध आया और उसने उस काले व्यक्ति को धमकाते हुए कहा कि तुम उसे क्यों मार रहे हो, मैं राजा हूं और मैं तुम्हें कठोर दंड दूंगा। जिस पर वह राजा के चरणों में गिर गया और अपना परिचय देते हुए बताया कि आप महान धार्मिक राजा हैं और मैं कलयुग हूं। मुझे आपके राज्य में रहने के लिए थोड़ी सी जगह चाहिए। जिस पर राजा ने उसे मना कर दिया। लेकिन अनुनय-विनय करने पर राजा ने कहा कि तुम जहां जुआ खेलते है वहां, मदिरापान होता है, हिंसा होती हो वहीं रहने की आज्ञा दे दी। कलयुग इससे प्रसन्न हुआ। इसी के कारण कलयुग में हिंसा ज्यादा हो रही है। सतयुग में तपस्या से इंसान को मुक्ति मिलती थी। द्वापर युग में यज्ञ से, त्रेता युग में चरण पादुका और कलयुग में मात्र भगवान के नाम लेने से ही मात्र मानव को मुक्ति मिल जाती है। कथा के दौरान जिला संस्कार मंच की ओर से जितेन्द्र तिवारी, राजेश भूरा यादव, मनोज दीक्षित मामा, मोर गार्डन की ओर से गौरव कुशवाहा, अश्विन दाने, देवेन्द्र दाने, अशोक ठाकुर, रोहित शर्मा, भय्यु प्रजापति सहित अन्य ने व्यास पूजन और आरती की। दाने परिवार ने बताया कि सात दिवसीय भागवत कथा दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक जारी है। कथा के पहले दिन कलश यात्रा निकाली गई थी। अब गुरुवार को कथा का चौथा दिवस है, उन्होंने क्षेत्रवासियों से कथा का श्रवण करने का निवेदन किया।








