तथाकथित अधिकारी फोकट का वेतन नहीं लेकर मुख्यालय के हिसाब से कार्य करें
नर्मदापुरम। यह तहसील मुख्यालय जिला मुख्यालय ही नहीं संभाग मुख्यालय है। यहां पर सभी विभागों के वरिष्ठ और कनिष्ठ तथाकथित अधिकारी मौजूद हैं। कुछ अधिकारी तो वास्तव में अपने मूल वेतन के हिसाब से कार्य करते भी हैं। यह उनकी ड्यूटी भी है क्योंकि सरकार ने उनको रखा भी इसीलिए है। कार्यालयों में अपनी सूरत दिखाने के लिए नहीं। अवैध शराब की बिक्री जमकर हो रही है यह कौन देखेगा। अवैध रेत का परिवहन हो रहा है यह कौन देखेगा। सट्टा जमकर हो रहा है यह कौन देखेगा। अपराध बढ़ रहे हैं। इसे कौन रोकेगा? सडकें खुदी पड़ी हैं। अनेक सड़कों पर बढ़े बढ़े गड्ढे हो रहे हैं इनको कौन सुधरवाएगा? जिनकी जबावदारी है वे फोकट का वेतन नहीं लेकर जरूरी कार्य करें तो मुख्यालय लग सके।
साफ-सफाई की कमी बनी हुई है। सडकों पर पशुओं के डेरे लगते हैं। सड़कों पर ही जमकर पार्किंग होती है। मुख्य बाजार क्षेत्र में सुलभ काम्पलेक्स की कमी है। लोडिंग आटो, तथा सवारी आटो के खड़े होने के स्टेंड से भी यातायाता व्यवस्था ठीक नहीं हो पाती है। इन तमाम अव्यवस्थाओं से परेशानी तो होती ही है साथ ही इससे शहर की खूबसूरती भी बिगड़ती है। व्यवस्था बिगड़ती है। इसलिए प्रशासन को पूरी गंभीरता के साथ शहर में पार्किंग के लिए विशेष प्रयास करना चाहिए। नागरिकिों की यह भी अपेक्षा है कि मुख्यालय पर विकास के कार्य तेजी से बढें सिर्फ खानापूर्ति होकर ही नहीं रहे।
शहर में विकास के कार्य तथा साफ-सफाई के तथा नागरिकों के हित के कार्य कम ही हो रहे हैं। नागरिकों का यह मानना है कि शहर में जो रेेत की ट्रालियां जाती हैं उससे गिरने वाली रेत से घूल बढ़ रही है। जिससे सडकों पर धूल की मात्रा बढ़ती जा रही है। वहीं नलों में टोंटी नहीं होने से पानी गिरने से दलदल होती जाती है।






