करीब 5 से 8 करोड़ के करोबार का अनुमान, छोटे व्यापारियों को मिला मुनाफा
नर्मदापुरम। संभाग का सबसे बड़ा मेला संत शिरोमणी श्रीराम जी बाबा मेला में इस बार प्राकृतिक आपदाएं नहीं हुई। पूर्व में बीते अनेक वर्षों में देखा गया कि मेला अवधि में एक दो बार बारिश जरूर हो जाती थी जिससे व्यापारियों को परेशानी होती थी। इस बार व्यापारियों व शहर तथा अासपास के लोगों को मेला खुशी बांटता रहा। बीते वर्ष कम व्यवसाय हुआ था। मेला की अवधि भी सिर्फ 10 दिन थी। इस बार तो 12 दिन से ज्यादा समय मिल गया। महा शिवरात्रि तक तथा उसके दूसरे दिन भी व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिल गया है। इस बार मेंला में करीब 5 से 8 करोड़ का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
मेला में जो रौनक शुरू हुई तो समापन होने के औपचारिक घोषणा के बाद बाद भी दो दिन तक भारी भीड़ रही। बाद में भी बिजली मिली उसके महाशिवरात्रि के दिन भी ग्राहकी होती रही। मेला में भारी भीड़ उमड़ती रही थी। दिन में व्यापारियों को खूब लाभ हुआ।
घर परिवार की जरूरी वस्तुओं की हुई बिक्री
मेला में अपनी जरूरत की वस्तुओं की खरीदी करने के लिए शहर के अनेक लोग पहुंचे। घर परिवार की आवश्यकताओं की सामग्री मेला में बाजार रेट से कम दाम में मिल रही थी। इस कारण मेला में लगातार ग्राहकी बनी रही।
सामान समेटने के साथ हुई ग्राहकी
मेला का समापन जरूर हो गया है लेकिन छोटी दुकाने लगी रही। कुछ दुकानदार सामान समेटने में लगने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र के लोग आए हुए थे जो मेला में अपनी पसंद की खरीदी कर रहे थे।
मेला परिसर में लगी थी 500 दुकानें
मेला तथा मेला से बाहर छोटी- बड़ी मिलाकर करीब 500-600 दुकाने लगी रही। जिनमें बच्चों तथा महिलाओं के काम की वस्तुएं ज्यादा आई थी। इन दुकानों पर प्रतिदिन भीड़ रहने के साथ ग्राहकी भी जमकर हुई। फुटपाथ वाली दुकानों पर ग्राहकी ज्यादा हुई।
दोनों पक्षों में खुशी
मेला में दुकान लगाने वाले दुकानदार तथा खरीदी करने वाले ग्राहकों को भी यहां पर अपनी पसंद के सस्ते सामान आसानी से मिल जाते हैं। इस कारण इस मेला से दोनों पक्ष में खुशी बनी रही।
महिलाओं और बच्चों ने की खरीददारी
मेला में सबसे ज्यादा सामग्री बच्चों के आयटमों की थी। इसी के साथ महिलाओं की सौदर्य सामग्री, रेडीमेड कपड़े, वेल्ट, चश्मा, घड़ी, मोबाइल के कवर, जूते सेडिंल, चप्पल, घर संसार, किचिन की सामग्री, घरों को सजाने के आयटम के अलावा, चाट, नास्ते की सामग्री, साफ्टी आइसक्रीम पर काफी भीड़ रही।
झूलों पर लिया आनंद
मेला में इस बार सबसे ज्यादा झूले आए हुए थे। एक दर्जन झूलों में रंग बिरंगी एलईडी लाइट लगी हुई थी जिससे पूरा मेला परिसर जगमग होता रहा। इन सभी झूलों पर रोजाना काफी भीड रही। झूले वालों को भी पहले की तुलना में अच्छी कमाई हुई है। क्योंकि दोपहर से लेकर रात के 11 बजे तक झूले चालू रहे।






