सनातन धर्म का विरोध करने वाले रावण बचेंगे नहीं पंमोहितरामजी

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जिस सनातन धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्री राम ने अपना सर्वस्व निछावर कर दिया था जिस धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्री राम ने अयोध्या का राज सिंहासन छोड़ परिवार छोड़ा माता-पिता को छोड़ दिया किंतु धर्म को नहीं छोड़ा वही धर्म का आज कई लोग विरोध करते हैं वह सब रावण हैं उक्त उद्गार पाल वाले बाबा हनुमान मंदिर प्रांगण दौराहा में चल रही नव दिवसीय श्री राम कथा के दौरान कथा व्यास क्रांतिकारी वक्ता गौभक्त पंडित मोहितरामजी पाठक ने व्यक्त किए आगे कथा में वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्री राम ने धर्म की स्थापना की है जब राजा जनक धनुष यज्ञ में धनुष न टूटने के कारण दुखी हुए तो भगवान ने धनुष को तोड़कर धर्म की स्थापना की राजा जनक हताश हो गए और उन्होंने कहा कि “क्या कोई भी मेरी पुत्री के योग्य नहीं है?” तब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने को कहा। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान राम शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष टूट गया। इस प्रकार सीता जी का विवाह राम से हुआ। भगवान श्री राम जानकी भारत की आत्मा है हम सबके परमात्मा है और राम का विरोध करने वाले सभी लोग रावण हैं इन रावण से सनातन रूपी सीता को बचाना होगा कहीं रावण सनातन का विरोध कर रहे हैं सभी सनातनी हिंदू एक होकर उनके खिलाफ खड़े होंगे तभी धर्म की विजय होगी आज कथा में सीहोर के विधायक श्री सुदेश जी राय मंडल अध्यक्ष सुरेश विश्वकर्मा प्रीतम सिंह ठाकुर आश्रम परिवार से जितेंद्र जी तिवारी रामबाबू जी सक्सेना प्रेमलता जी राठौर उर्मिला जी गुप्ता एवं बड़ी संख्या में श्रोता राम भक्त पढ़ रहे हैं आयोजन समिति में संपूर्ण क्षेत्र वासियों से कथा में पधार कर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया.

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