नर्मदा पुराण में उमड़ा आस्था का सैलाब

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नर्मदा नदी का सनातन धर्म में विशेष स्थान-पंडित चेतन उपाध्याय
सीहोर। नर्मदा नदी का सनातन धर्म में विशेष स्थान है। देवों के देव महादेव की पुत्री हैं नर्मदा। नर्मदा पुराण के अनुसार शिव से नर्मदा की उत्पत्ति हुई है। इसलिए वे शिव की पुत्री हैं। नर्मदा के अनेक नाम है, लेकिन इनमें शांकरी, रुद्रदेह, रेवा प्रमुख नाम है। वायुपुराण के अनुसार तांडव नृत्य करते समय शिव का जो पसीना निकला वह नर्मदा के रूप में प्रवाहित हुआ। वहीं स्कंद पुराण के अनुसार शिव की तपस्या के दौरान निकले पसीने की बूंद से नर्मदा की उत्पत्ति हुई है। उक्त विचार शहर के ब्रह्मपुरी कालोनी स्थित भगवान शिव मंदिर में जारी सात दिवसीय नर्मदा पुराण के छठवें दिन कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय ने कहे।
उन्होंने गुरु के महत्व बताते हुए कहा कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती है। गुरु ही हमें धर्म का मार्ग दिखाते हैं। मानव के जीवन में पांच गुरु आवश्यक हैं। प्रथम गुरु मां होती है, जो जन्म देती है। दूसरे गुरु पिता जो पालन करते हैं। तीसरे गुरु व्यवसाय सिखाने वाले, चौथे गुरु कुलगुरु जो संस्कार सिखाते हैं और पांचवें गुरु सद् गुरु होते हैं, जो सत्य और परमात्मा का ज्ञान कराते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु की शरण में आकर व्यक्ति उनके ज्ञान को धारण करे तो उसका गुरु की शरण में आना सार्थक हो जाता है। लोग गुरु की पूजा करते हैं, लेकिन गुरु के शब्दों की ओर ध्यान नहीं देते हैं। गुरु को मानने के बजाय उनकी बात मानना श्रेष्ठ है। कोई भी गुरु यह नहीं चाहता कि मेरा शिष्य अज्ञानी रहे। हर गुरु यही चाहता है कि मेरा शिष्य मेरे ही समान बने।

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