सीहोर/ परम पूज्य भक्तामर वाले बाबा उच्चारणाचार्य विनम्र सागर जी गुरुदेव ने मधुर वाणी में कहां कि जिन प्रभु का जोंन्वहन करें पाप कर्म का दहन करें, बुरे भाव को शमन करते हैं गुणगान यहां उनका हो,यशगान यहां ,अच्छी हो तब ये कर पायें रे आचार्य श्री ने कविता की पंक्तियों के साथ प्रवचन में कहां कि हर व्यक्ति तलाश में रहता है प्रातः जल्दी उठकर श्रेष्ठ महान आनंदित व्यक्ति को देखें जब सुबह कोई मुनिराज का दर्शन सर्वप्रथम होता है तो कहते हैं आज का दिन हमारा बहुत अच्छा व्यतीत होगा क्योंकि सबसे पहले उर्जावान व्यक्ति के दर्शन किए हैं। इसलिए प्रातः उठकर परमात्मा के दर्शन करने जाते हैं। अभिषेक पूजन भक्ति आराधना करके अपने सौभाग्य को बनाकर फिर अपने दिन का शुभारंभ करते हैं। तो करोडे अरबों की संपदा ही क्या रत्नत्रय रुपी संपदा भी प्राप्त हो जाती है। इसलिए अपने दिन को हर क्षण को अपने जीवन को अमूल्य बनाना है तो प्रातः उठकर उर्जावान ,गुणवान,मधन श्रेष्ठ, आनंदित व्यक्ति के दर्शन करो । मनहूस व्यक्ति को देखने से दिन खराब हो जाता है तो महान ऊर्जावान व्यक्ति को देखने से दिन व जीवन सफल हो जाता है। इसलिए महानता प्राप्त करने के लिए महान व्यक्तियों से मिलिए सम्पर्क में रहिए सब कुछ मिलेगा। आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रातः श्री जी के अभिषेक, शांति धारा नित्य नियम पूजा अर्चना धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर श्रावक श्राविकाओं ने धर्म लाभ अर्जित किया। तत्पश्चात आचार्य श्री के धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रवचन हुए।








