करोड़ों के ब्रिज में गलत दिशा से जा रहे वाहन भोपाल (आरएनएस)। शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके बाबूलाल गौर सेतु ओर अंबेडकर ब्रिज बनाया गया, ताकि वाहन चलाक सुरक्षित आवाजाही कर सकेंगे। लेकिन अधिकारियों की गलत प्लानिंग की वजह से वाहन चलाक गलत दिशा (रांग साइड) से जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। बाबूलाल गौर सेतु (बावडिय़ा कलां ओवर ब्रिज), अंबेडकर ब्रिज और हबीबगंतज अंडर ब्रिज इन तीनों स्थानों से वाहन चालकों को रांग साइड से जाता हुआ देखा जा सकता है। जिन चालकों को मिसरोद की तरफ जाना है, वह बावडिय़ा ब्रिज, से रांग साइड से जाते हैं। जिन वाहन चालकों को अरेरा कालोनी की तरफ जाना है, वह अंबेडकर ब्रिज गणेश मंदिर की तरफ से रांग साइड होकर जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीनों स्थानों से दिनभर में 50 हजार से अधिक वाहन चालक रंाग साइड से आवाजाही करते हैं। जिनके साथ दुर्घटना की आशंका बनी रहती है । इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा। जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। एक्सर्ट मानते हैं कि ब्रिज के डिजाइन की खामियों की वजह से जहां डिवाइडर नहीं होने चाहिए थे, वहां डिवाइडर हैं। इससे यह स्थिति बनी है। अनिल पुरोहित 000000000000000000000

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भोपाल (आरएनएस)। शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके बाबूलाल गौर सेतु ओर अंबेडकर ब्रिज बनाया गया, ताकि वाहन चलाक सुरक्षित आवाजाही कर सकेंगे। लेकिन अधिकारियों की गलत प्लानिंग की वजह से वाहन चलाक गलत दिशा (रांग साइड) से जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। बाबूलाल गौर सेतु (बावडिय़ा कलां ओवर ब्रिज), अंबेडकर ब्रिज और हबीबगंतज अंडर ब्रिज इन तीनों स्थानों से वाहन चालकों को रांग साइड से जाता हुआ देखा जा सकता है। जिन चालकों को मिसरोद की तरफ जाना है, वह बावडिय़ा ब्रिज, से रांग साइड से जाते हैं। जिन वाहन चालकों को अरेरा कालोनी की तरफ जाना है, वह अंबेडकर ब्रिज गणेश मंदिर की तरफ से रांग साइड होकर जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीनों स्थानों से दिनभर में 50 हजार से अधिक वाहन चालक रंाग साइड से आवाजाही करते हैं। जिनके साथ दुर्घटना की आशंका बनी रहती है
। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा। जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। एक्सर्ट मानते हैं कि ब्रिज के डिजाइन की खामियों की वजह से जहां डिवाइडर नहीं होने चाहिए थे, वहां डिवाइडर हैं। इससे यह स्थिति बनी है।

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