भोपाल (आरएनएस)। कैडर बेस और अनुशासन वाली भाजपा की इस संगठनात्मक चुनाव में दिन में तारे देखने को मजबूर होना पड़ा। जिलाध्यक्ष पद के लिए जिस तरह से दिग्गज आपस में टकराए उसने निर्णयकर्ताओं को परेशन कर दिया। आलक यह रहा कि जिलाध्यक्ष पद के लिए दिल्ली ने जो गाइडलाइन तय की थी, वह चकनाचूर हो गई। मजबूरी यहां तक पहुंची कि पार्टी को अपने दो संगठनात्मक जिले बढ़ाने पड़े। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव का पार्टी नेतृत्व ने संगठन पर्व का नाम दिया और उसी आधार पर बूथ कमेटी, मंडलाध्यक्ष के चुनाव भी कराए गए, लेकिन जिलाध्यक्ष पद के निर्वाचन प्रक्रिया तक यह पर्व नेताओं की आपसी टकराहट में तब्दील हो गया। इस कारण पार्टी को अपने 62 संगठनात्मक जिलों के लिए आठ सूचियां जारी करनी पड़ीं। इंदौर के दो जिलाध्यक्ष चुनने के लिए पार्टी ने एक सप्ताह से भी ज्यादा का अलग समय लिया।








