पांच दिवसीय शिव महापुराण में आज मनाया जाएगा भगवान शिव का विवाह

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 शरीर रूपी बंधन से मुक्ति मिलती है तब मोक्ष मिलता है-कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा
सीहोर। हमारे जीवन में दो मार्ग हैं, एक बंधन का मार्ग और दूसरा मोक्ष का मार्ग। ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि मृत्यु के बाद जब शरीर रूपी बंधन से मुक्ति मिलती है तब मोक्ष मिलता है, लेकिन सच्चाई यही है कि मनुष्य जीवित रहते हुए मोक्ष प्राप्त कर सकता है। उक्त विचार  शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल पंचायती भवन में अग्रवाल महिला मंडल और मध्यप्रदेश अग्रवाल महासभा के संयुक्त तत्वाधान में जारी पांच दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा ने कहे। गुरुवार को उन्होंने माता सती के चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहाकि मुक्ति और मोक्ष में बहुत अंतर है। मोक्ष का तत्वज्ञान समझते हुए हम जीवन को सफलता की चरम सीमा तक पहुंचा सकते हैं। हमें मानव जीवन मिला ही इसलिए है कि हर व्यक्ति इस परम पुरुषार्थ के लिए कर्म करे और परमतत्व की प्राप्ति के लिए इस प्रयोग को सार्थक बनाए। बंधन और मोक्ष में फर्क सिर्फ इतना है कि जब आसुरी संपदा हमारे पास बढ़ेगी, तो हम बंधन की ओर बढ़ेंगे, लेकिन जब दैवीय संपदा हमारे पास बढ़ेगी तो हम मोक्ष की तरफ बढ़ जाएंगे। बंधन का मकड़जाल हमें जकड़े रहता है, लेकिन इससे छुटकारा पाना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए मोक्ष जरूरी है।
मनुष्य को कभी भी झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए
उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी भी झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। झूठ बोलने से मनुष्य का चरित्र नष्ट हो जाता है। शिव महापुराण की कथा सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। भक्ति के बिना मनुष्य का उद्धार नहीं होता। भक्ति नो प्रकार की होती है। भक्ति से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती हैं। अपना कर्म स्वयं करो। अंतिम समय में जो तुमने कमाया है वही तुम्हारे साथ जाएगा। जब तुम्हारे प्राण छूटेंगे सब यहीं रह जाएगा। शरीर से टूट जाना मगर मन से कभी मत टूटना। सौभाग्यशाली होती हैं वह जीव आत्माएं, जिन्हें संतों की संगत में बैठकर भगवान शिव की कथा को श्रवण करने का अवसर मिलता है। कथा यज्ञ स्थली एक ऐसा माध्यम है, जहां आकर माया में लिप्त हमारा मन कुछ समय के लिए प्रभु का चिंतन एवं गुणगान कर विश्राम पाता है। कल्याणकारी कथा जीने की कला सिखाती है।

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