आज किया जाएगा सती चरित्र का वर्णन
भगवान ने अगर आपको कुछ दिया है तो उसमें अहंकार नहीं आना चाहिए-कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा
सीहोर। हर समय सत्कर्म करते रहना चाहिए। अच्छे कर्म की जो सुगंध होती है वह श्रेष्ठ होती है। भगवान पद दे, प्रतिष्ठा दे, धन दे, वैभव दे, सत्ता दे, कुर्सी दे, आपकी शोहरत, आपका नाम दे तो प्रयास करना अपनी जिंदगी में ऐसे कर्र्म करके जाना कि लाखों लोगों की प्रेरणा का एक स्त्रोत बन जाए। पद, प्रतिष्ठा, धन, वैभव, शोहरत, सुंदरता का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं। भगवान ने अगर आपको कुछ दिया है तो उसमें अहंकार नहीं आना चाहिए। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल पंचायती भवन में अग्रवाल महिला मंडल और मध्यप्रदेश अग्रवाल महासभा के संयुक्त तत्वाधान में बुधवार से आरंभ हुई पांच दिवसीय शिव महापुराण के पहले दिन कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा ने कहे। कथा के पहले दिन आस्था और उत्साह के साथ शहर के बड़ा बाजार स्थित प्राचीन सत्यनाराण मंदिर से शोभा यात्रा निकाली गई थी। जिसमें क्षेत्रवासी शामिल थे। अनेक स्थानों पर यात्रा में शामिल पंडित श्री मिश्रा का पुष्प वर्षाकर स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि चंचुला नाम की स्त्री को जब संत का संग मिला वह शिव धाम की अनुगामिनी बनी। एक घड़ी के सत्संग की तुलना स्वर्ग की समस्त संपदा से की गई है। भगवान शिव भी सत्संग का महत्व मां पार्वती को बताते हुए कहते हैं कि उसकी विद्या, धन, बल, भाग्य सब कुछ निरर्थक है जिसे जीवन में संत की प्राप्ति नहीं हुई। परंतु वास्तव में सत्संग कहते किसे हैं। सत्संग दो शब्दों के जोड़ से मिलकर बना यह शब्द हमें सत्य यानि परमात्मा और संग अर्थात् मिलन की ओर इंगित करता है। परमात्मा से मिलन के लिए संत एक मध्यस्थ है, इसलिए हमें जीवन में पूर्ण संत की खोज में अग्रसर होना चाहिए, जो हमारा मिलाप परमात्मा से करवा दे। भक्ति के बिना जीवन अधूरा है, लाखों योनियों में सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का है, भगवान के आशीर्वाद के बिना मनुष्य जीवन प्राप्त नहीं होता भगवान शिव का संपूर्ण चरित्र परोपकार की प्रेरणा देता है। भगवान शिव जैसा दयालु करुणा के सागर कोई और देवता नहीं है।
मानव जाति को सुख-समृद्धि व आंनद देने वाली
कथा के पहले दिन पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि शिव महापुराण मानव जाति को सुख-समृद्धि व आंनद देने वाली है। क्योंकि भगवान शिव कल्याण एवं सुख के मूल स्त्रोत हैं। भगवान भोले नाथ की कथा में गोता लगाने से मानव को प्रभु की प्राप्ति होती है, लेकिन भगवान शिव की महिमा सुनने व उनमें उतरने में अंतर होता है। सुनना तो सहज है, लेकिन इसमें उतरने की कला हमें केवल एक संत ही सिखा सकता हैं। शिव महापुराण एक विलक्षण व दिव्यता से परिपूर्ण ग्रंथ है। शिव महापुराण की कथा मानव जाति को सुख समृद्धि व आनंद देने वाली है। क्योंकि भगवान भूतों के अधीश्वर साक्षात परमात्मा हैं। जो समस्त जीवों को आत्म ज्ञान देकर ईश्वर से जुडऩे की कला सिखाते हैं।








