स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं संभालने में अक्षम सिद्ध हो रहे डॉ दिनेश देहलवार
नर्मदापुरम। डॉ दिनेश देहलवार को सिविल सर्जन के बाद सीएमएचओ के प्रभारी पद दिए जाने के बाद जिले के लोगों को यह उम्मीद थी कि कुछ दिनों तक काम चलाऊ सीएमएचओ बनाया जाएगा लेकिन यह उनके जादू का ही कमाल है कि संभाग मुख्यालय के जिला मुख्यालय पर उन्हें इतने लंबे समय तक प्रभार दिया गया है। शायद शासन भी मजबूर होगा कि विभाग के पास संभाग मुख्यालय जैसे स्थान पर भी प्रभारी से ही काम लेना हो। उनकी कार्यप्रणाली शुरू से ही चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं उनसे नहीं संभल रही है तव भी उनसे ही काम लिया जा रहा है।
उनके कार्यकाल में सिवनी मालवा में एक विवाहिक कार्यक्रम के दौरे के समय जब वे कुछ लोगों के साथ थे तब एक सड़क हादसे में जिले के होनहार युवक अक्षय दीक्षित की सडक हादसे में मौत हो गई थी तब सीएमएचओ भी उसी वाहन में सवार होने के बाद वे घटना स्थल से भाग गए थे। उनके साथी घायल थे। फिर भी सीएमएचओ जैसे व्यक्ति का वहां से चले जाना तथा काेई व्यवस्था नहीं करना भी अभी तक चर्चा का विषय बना हुआ है। अक्षय दीक्षित के पिताश्री अरूण दीक्षित का कहना है कि सीएमएचओ जैसे पद पर उन्हें बने रहने का कोई ओचित्य नहीं है। उनमें मानवीयता नहीं है।
इसी तरह की बातें विभाग के अनेक कर्मचारी दबे स्वर से करते हैं। जिले के अनेक संगठन यह मांग कर रहे हैं कि शासन को अब ऐसे सीएमएचओ को यहां से हटा देना चाहिए यदि सीएमएचओ ही बनाना हो तो किसी छोटे जिले में उन्हें भेजा जाना चाहिए यहां उनका कार्यकाल विवादित ही माना जाएगा। लोगों से उनके व्यवहार भी ठीक नहीं है। बात करने की शैली भी उनकी बिगडती जा रही है। इसलिए स्वास्थ्य जैसे विभाग में मुखिया का पद किसी अन्य वरिष्ठ डाक्टर को साैंपा जाना चाहिए नहीं तो किसी दिन बडे विवााद का कारण बन सकते हैं। यदि शासन ने फिर भी ऐसे सीएमएचओ से मोह नहीं छोड़ा तो मुख्यालय पर उनके नाम पर धरना प्रदर्शन होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।






