किसी भी तहसील या ब्लॉक या गांव का परिसीमन करने से पहले उसकी भौगोलिक स्थिति देखी जाएगी – मुकेश शुक्ला

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प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की प्रदेश की पहली बैठक नर्मदापुरम जिले में आयोजित हुई

नर्मदापुरम/ कोई भी नई तहसील ब्लाक ग्राम पंचायत बनाते समय या उसकी सीमा जिले मैं शामिल करने से पहले उस स्थान की भौगोलिक स्थिति,  जनसंख्या,  स्ट्रक्चर मूलभूत सुविधाओं का होना भी आवश्यक होगा। प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के कार्य करने की पद्धति का निर्धारण कार्य क्षेत्र लक्ष्य टर्म्‍स ऑफ रिफरेंस आदि की जानकारी देने के लिए गुरुवार को प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की प्रदेश की पहली बैठक आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश शुक्ला की अध्यक्षता में नर्मदापुरम जिले में आयोजित की गई। कलेक्टर सभाकक्ष में आयोजित बैठक में प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के सचिव श्री अक्षय सिंह,  नर्मदा पुरम संभाग कमिश्नर श्री के जी तिवारी,  कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना,  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत,  उपायुक्‍त राजस्‍व श्री गणेश जायसवाल,  अपर कलेक्टर श्री डीके सिंह एवं समस्त अनुविभागीय राजस्व अधिकारी एवं तहसीलदार उपस्थित थे। अध्यक्ष श्री मुकेश शुक्ला ने बैठक में सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारी एवं तहसीलदार को निर्देश दिए कि वह किसी भी प्रशासनिक इकाई के पुनर्गठन से पहले जनप्रतिनिधियों एवं जनता से फीडबैक लेकर आपस में समन्वय स्थापित करके राजस्व सीमाओं के पुनर्गठन का प्रस्ताव कलेक्टर को प्रेषित करें। कलेक्टर सभी प्रस्ताव पर विचार करके अपने सुझाव एवं निर्णय से आयोग को अवगत कराएंगे।

श्री शुक्ला ने बताया कि जनपद एवं तहसील की सीमाओं का परिसीमन किया जाना है लेकिन यदि परिसीमन की आवश्यकता नहीं है तो परिसीमन नहीं भी किया जाएगा। परिसीमन को और अधिक जन्मोमुखी  बनाया जाएगा ताकि इसके आधार पर जन अपेक्षा के आधार पर ज्यादा से ज्यादा जनता को सुविधा दिलाई जा सके। नवीन प्रशासनिक इकाई के लिए मार्गदर्शन सिद्धांत बनाए गए हैं। वर्तमान में ऐसे कई तहसील एवं ब्लॉक तथा ग्राम पंचायत है जो जिला मुख्यालय से दूर है लेकिन दूसरे अन्य जिले के समीप है ।ऐसे प्रशासनिक इकाइयों में चेंज करने एवं परिवर्तन करने की आवश्यकता है। गत माह मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में तत संबंध में परिसीमन के संबंध में बैठक भी आयोजित की गई थी। प्रत्येक जिले के कलेक्टर को जनप्रतिनिधि एवं आम जनता सुझाव देगी कि कैसे सीमाओ का निर्धारण कहां पर किस मान किया जाना उचित रहेगा। कलेक्टर उसे अपडेट करेंगे। प्रश्नावली को पब्लिक डोमेन में लाकर उसके जवाब तैयार कर सुझाव दिये जाएगे जिसकी समीक्षा राज्य स्तर पर की जाएगी।

 श्री शुक्ल ने कहा कि यदि भौगोलिक गठन चाहते हैं तो बताना पड़ेगा कि कुछ तहसील एवं गांव तहसील या जिले से दूर है या अन्य किसी दूसरे जिले के करीब है। दूरी के मापदंड बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए परिसीमन में यह आवश्यक देखा जाएगा की जनसंख्या का संतुलन हो यदि हम कोई जिला बना रहे हैं तो वहां यदि जनसंख्या कम है एवं सुविधाएं नहीं है तो इसका कोई लाभ  नहीं है,  वहीं कई बार कुछ जगह पर जनसंख्या ज्यादा रहती है एवं औद्योगिक विकास भी है लेकिन हम उसे तहसील या जिला का दर्जा नहीं दे सके हैं या घोषित नहीं कर सके हैं तो नए प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन में यह सभी बातें शामिल की जाएगी। साथ ही स्थानीय भाषा संस्कृति को आवश्यक रूप से संरक्षण भी दिया जाएगा।

 श्री शुक्ला ने कहा कि यदि किसी स्थान को हम मुख्यालय बनाना चाहते हैं तो जनसंख्या, औद्योगिक क्षेत्र एवं भौगोलिक दूरी उसकी अन्य क्षेत्र से ना हो इसका अनिवार्य रूप से ध्यान रखा जाएगा। इसके साथ ही प्रस्तावित इकाइयों को सुविधा की दृष्टि से पुनर्गठन करने या गठन घटाने के संबंध में भी आवश्यक सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेश संरचना का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

श्री शुक्ल ने कहा कि यदि किसी जिले की सीमा की तहसील या ग्राम को किसी दूसरे जिले की सीमा में मिलना चाहते हैं तो उसके लिए संभाग कमिश्नर सुझाव देंगे और यदि जिले के अंदर तहसील में कोई परिवर्तन करना चाहते हैं तो इसका सुझाव कलेक्टर देंगे।

अध्यक्ष श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि ग्राम स्तर पंचायत स्तर,  राजस्व निरीक्षक मंडल स्तर,  तहसील स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें किसी भी प्रशासनिक इकाई का कोई युक्ति युक्तिकरण, विलोपन,  नवीन सर्जन किया जाना है तो उसका उचित प्रस्ताव तैयार कर प्रश्नावली को अद्यतन कर पृथक से शामिल कर कलेक्टर को भिजवाए जा सकेंगे। जिले की समस्त तहसीलों एवं अनु विभागों की बैठक के उपरांत कलेक्टर अपने स्तर पर अधीनस्थों से प्राप्त प्रस्ताव पर युक्ति युक्तिकरण पर वृहद चर्चा कर उस प्रस्ताव को अंतिम रूप से तैयार कर एवं प्रश्नावली को अदयतन कर आयोग को भेजेंगे। श्री शुक्ल ने बताया कि कलेक्टर अपने प्रस्ताव तैयार करते समय जनप्रतिनिधि की राय भी लेंगे एवं पूर्व में किसी प्रशासनिक इकाई के युक्ति युक्तिकरण में यदि कोई आवेदन या मांग पत्र आया हो तो जिला स्तर पर पेंडिंग हो तो उसे भी कलेक्टर विचार में लेंगे। यहां यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि परिवर्तन या युक्ति युक्ति करण विलोपन,  नवीन सृजन, आवश्यक नहीं है तो ना किया जाए लेकिन यदि कोई मांग इस संबंध में पूर्व से जन सामान्य की ओर से चली आ रही है तो उस पर विचार कर उसे मांग का परीक्षण आवश्यक कर लिया जाए। जिला स्तर पर सभी विभागों के जिलाधिकारी से भी चर्चा की जाए ताकि उनके विभागों की कार्य प्रणाली का भी मत आ सके। इन प्रस्ताव में मानव संसाधन की दक्षता या प्रशिक्षण या संस्थागत ढांचे की आवश्यकताओं पर भी विचार किया जाएगा। कलेक्टर समीक्षा उपरांत जिले का एक अंतिम प्रस्ताव बनाकर प्रश्नावली को अदयतन करेंगे।

टर्म्स आफ रेफरेंस 1 और टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस 3 के संबंध में जो प्रश्नावली तैयार की गई है उन प्रश्नावली के प्रश्नों के अतिरिक्त भी यदि कोई बिंदु है जो कलेक्टर उसे अपने प्रस्ताव में समावेश करना चाहेंगे तो वह कर सकते हैं। कलेक्टर सोनिया मीना ने कहा कि युक्ति युक्ति करण के प्रस्ताव का रीजन एवं जस्टिफाई होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई विभागों के क्षेत्र को लेकर विसंगतियां हैं उन्हें भी दूर किया जाएगा। उन्होंने अध्यक्ष को आशवस्त किया कि एक माह में सभी आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर आयोग को प्रेषित किए जाएंगे।

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