सीहोर यदि तुम श्री राम भगवान महावीर स्वामी की तरह उच्च कुल धार्मिक परिवार चाहते हो तो।
बस अपनी प्रशंसा और दूसरों की बुराई निंदा करना छोड़ दो मनुष्य में यह बड़ी कमजोरी है कि अपने दोषों को छिपाता है, और दूसरे के गैर मोजूद दोषों का चप्पे-चप्पे में प्रचार करता है। दूसरे के गुणों को नहीं कहता हैं। अपने में जो गुण नहीं भी हैं उन्हें कहता घूमता है। यही तो मनुष्य को दरिद्री रोगी, नीचकुलीन कुल में जन्म लेने को मजबूर करता है। इसके विपरीत अपने दोषों को प्रकट करना। दूसरों के दोषों को छिपाना , नम्रता का भाव रखना मान कषाय अहंकार से दूर रहना हमें संपन्न कुल स्वस्थ्य शरीर श्रीराम हनुमान भगवान महावीर जैसे महापुरुषों के कुल में जन्म का सुअवसर प्रदान करना। हमारा वर्तमान क्रियाकलाप मन का भाव भविष्य का जीवन निश्चित करता है। मुनिश्री ने आगे प्रेरणा के स्वरुप कहा कि हमें किसी प्रकार का अहंकार करना कहीं से भी उचित नहीं है। सबके दिन हमेशा एक जैसे नहीं हुआ करते हैं।
राजा को भी कभी रंक बनना पड़ता है। कहां लंकापति रावण नरक के दुखों को भोग रहा है। वही पशु योनि का जटायु पक्षी का पुण्योदय आया वह श्री राम सीता का पुत्रवत हों गया। भाईयो अच्छे काम करो परोपकार करना सीखो दूसरों पर दया करना सीखो। किसी के भी अच्छे काम में बाधक न बनों अच्छे काम में हमेशा सहयोग करो अच्छे काम की हमेशा अनुमोदना करो । ऐसे खान पान से सदेव बचो दूर रहो जो मांसाहारी है। किसी जीव के जीवन को समाप्त करके बनाया गया हो। यदि हम किसी का जीवन बचा नहीं सकते है तो किसी का जीवन नष्ट करतें क्यों है। मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ने यह भी कहा कि चिकनी चोपड़ी बात तो नेता लोग भी करते हैं। धर्म ग्रन्थ शास्त्र की बात सुनो शास्त्र की बात करो । इसी में सुख शांति की प्राप्ति होगी ।यह मानव जीवन बार बार नहीं मिलता है। इसको अच्छे और सच्चे धार्मिक भावनाओं से परिपूर्ण जीवन जीने से इंसान मनुष्य बनकर सार्थक करो । गुरुवार को प्रात: कस्बा स्थित श्रीचंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज के सानिध्य में श्रीं जी के अभिषेक शांति धारा नित्य नियम पूजा अर्चना धार्मिक अनुष्ठान श्रावक श्राविकाएं संपन्न कर धर्म लाभ अर्जित करेंगे। तत्पश्चात धर्म सभा में मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज के प्रवचन होंगे।








