सीहोर/स्टेशन शीतकालीन वाचना के प्रवाह में श्रीं पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर के सभा ग्रह में धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पाठशाला प्रेरक मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज साहब ने बताया कि तत्व सात होते हैं जीव अजीव आसृरव बंध संवर निजरा ओर मोक्ष तत्व का सीधा सा अर्थ होता है वस्तु का स्वभाव जैसे नमक का स्वभाव खारापन ,मिश्री का स्वभाव मीठा पन इत्यादि। मुनि श्री ने विस्तार से बताते हुए कहां कि जीव का स्वभाव जानना स्वभाव के बिना वस्तु नहीं ओर वस्तु के बिना स्वभाव नहीं होता है। यही वस्तु व्यवस्था विश्व में सनातन है यही सनातन धर्म है जो अनादिकाल से है ओर अनंतकाल तक रहेगा। ऐसा वस्तु का धर्म स्वभाव सनातन धर्म है। जल का शीतल होना अग्नि का उष्ण होना और जीव का अहिंसक होना भी सनातन धर्म है। मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे जल में शीतलता स्वभाव है वैसे ही जीव मेंअहिंसा स्वभाव है। शेरनी भी अपने बच्चे की हिंसा नहीं करतीं हैं। क़साई अपने बच्चे को कभी काटता नहीं है। वैसे ही सब जीवो पर दया करो यही तो धर्म का सच्चा मर्म है दोपहर में स्वाध्याय धार्मिक शिक्षण कक्षा में श्रद्धालुओं ने ज्ञानार्जन किया। संध्या को गुरु भक्ति संगीत मय भजन कीर्तन करते हुए श्रद्धालुओं ने भगवान कि भक्ति कर धर्म लाभ अर्जित किया।







