सीहोर/ हमारे देश को यूं तो आजाद हुए लगभग 77 वर्ष हो गये है लेकिन आज भी सांस्कृतिक दृष्टि से अंग्रेजों के गुलाम बने हुए हैं। बताओ बंधुओं आप कब तक रहोगे अंग्रेजों के गुलाम ?
उक्त उदगार मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ने श्रीं पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आगे कहां कि भारतीय संस्कृति में गुड़ीपड़मा(चैत्र शुक्लपक्ष एकम अथवा दीपावली, व कार्तिक कृष्णा अमावस्या नया वर्ष होता है। इन तिथियों को तो आप प्रायः भूल गये है। और 1 जनवरी को NEW YEAR नया वर्ष का उत्सव मनाने लगे हैं। यह बड़ी विडम्बना है कि भारत देश में रक्षाबन्धन दीपावली अक्षयतृतीया पर्व फीके पड़ते जा रहे हैं। और न्यू इयर, बर्थडे, एनिवर्सरी ,वेलेन्टाइन डे जैसे गन्दे प्रसंगों को पर्व के रुप में मानने लगे है। बच्चों को हिंदी माध्यम से पढ़ाना अच्छा नहीं मानते है। अंग्रेजी स्कूल अग्रेजी माध्यम ही आप उत्तम LGRIMIK HIKE, मान रहे हैं।
1880 में ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ ने लार्ड मेकालो को भारत भेज कर सर्वे कराया कि हम भारत को कब तक गुलाम बनाकर रख सकते हैं। तब लार्ड मैकाले ने अपने पिता को लिखे पत्र में कहा था कि भारतीय लोगों की साँस्कृतिक जड़े बड़ी मजबूत हैं। यहाँ सबका विश्वास भगवान में रहता है। यहाँ के साधू संत बड़े ज्ञानी तपस्वी हैं। लोग इनके भक्त है इनकाआशीवार्द भी बड़ा गजब का है। अतएव यह लम्बे समय तक गुलाम नहीं रह सकते है। फिर भी मैंने एक प्रयास किया है मैकाले ने बताया कि मैंने कोलकता में कान्वेट स्कूल खोला है। जिसमें बड़े-२ घर के बच्चे भी अंग्रेजी में पढ़ना पसंद करने लगे हैं। भारत के हर नगर गांव में कांवेन्ट स्कूल खोलना है। यहा के लोग हिंदी न लिख सके ओर वही अंग्रेजी बोल न पायेंगे। ओर भारत हमेशा हमेशा के लिए गुलाम हो जायेगा । हम आज लार्ड मैकाले का सपना साकार कर रहे हैं। जागो देश वासियों जागो अब भी मोका है सम्हल जाओ वरना रोना ही हाथ रहेगा भावी पीढ़ीया तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगी। हम न अधूरे हैं न हम अभागे हैं बात इतनी सी है हम जागें नहीं है। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज साहब से दीक्षित आचार्य समय सागर जी महाराज साहब के आज्ञाकारी शिष्य पाठशाला प्रेरक मुनि श्री निर्णय सागर जी के सानिध्य में प्रातः श्री जी के अभिषेक शांति धारा नित्य नियम पूजा अर्चना धार्मिक अनुष्ठान श्रावक श्राविकाएं संपन्न कर धर्म लाभ अर्जित किया। तत्पश्चात धर्म सभा में मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रवचन दिये।
दोपहर में स्वाध्याय धार्मिक शिक्षण कक्षा में श्रद्धालुओं ने ज्ञानार्जन किया।
संध्या को गुरु भक्ति संगीत मय भजन कीर्तन श्रद्धालुओं ने कर प्रभु भक्ति कर पुण्य लाभ अर्जित किया।







