उज्जैन (आरएनएस)। महाकालेश्वर मंदिर में धनतेरस पर परंपरागत धन-समृद्धि पूजा के साथ उज्जैन में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरूआत हो गई। पुजारी-पुरोहितों ने बाबा महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन-अभिषेक किया। भगवान महाकाल को चांदी का सिक्का अर्पित किया। वहीं, प्रदेश के एकमात्र कुबेर मंदिर में पंचामृत पूजन किया गया। इसके बाद दिनभर श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।धनतेरस पर महाकाल मंदिर के नंदी हॉल में पुरोहित समिति के पुजारियों ने महापूजा की। वैभव, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजन शुरू हुआ। पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास ने बताया कि जनकल्याण और विश्वकल्याण के लिए पहले गणपति और महालक्ष्मी पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक किया। पूजन में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पंडे-पुजारी शामिल हुए। तिथियों की घट-बढ़ के कारण इस बार दीपोत्सव के पर्वों के बीच एक-एक दिन का अंतर रहेगा। 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दीपावली और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा होगी। महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना और उत्सव ग्वालियर पंचांग के अनुसार होते हैं।दीपोत्सव के पांचों दिन भगवान महाकाल की आरती में परंपरानुसार फुलझड़ी जलाई जाएगी। मंदिर दीपों, पुष्पों और विद्युत रोशनी से सजाया जाएगा। परिसर में रंगोली भी बनाई जाएगी। दीपावली के अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर की आरती-पूजन के दौरान प्रत्येक आरती में केवल एक फुलझड़ी जलाई जाएगी। यह क्रम सुबह भस्म आरती, अभ्यंग स्नान के बाद होने वाली आरती, संध्या आरती और शयन आरती में रहेगा।








