नई दिल्ली (आरएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का कार्यक्रम घोषित किया है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची में शामिल न हों। आयोग ने इसके लिए एक जनवरी 2027 को मुख्य अर्हता तिथि निर्धारित की है। पुनरीक्षण की प्रक्रिया नवंबर 2026 में शुरू होकर जनवरी 2027 में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ पूरी होगी।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस पुनरीक्षण कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, मिजोरम, ओडिशा तथा सिक्किम शामिल हैं। इन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में निर्धारित समयसीमा के भीतर मतदाता सूची की जांच और सुधार किया जाएगा। इसके अंतर्गत नए मतदाताओं के नाम जोडऩे, मौजूदा मतदाताओं के विवरण में संशोधन करने और अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पुनरीक्षण में पहली बार मतदान करने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विशेष सुविधा दी गई है। एक जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के पात्र होंगे। इसके अलावा, वर्ष 2027 की अगली तीन अर्हता तिथियों यानी एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी अग्रिम रूप से आवेदन कर सकेंगे।इस व्यवस्था से युवाओं को मतदाता बनने के लिए अगली पुनरीक्षण प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आयोग का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र युवाओं को मतदाता सूची से जोडऩा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। इनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, दिल्ली, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं।
वहीं, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुनरीक्षण की तारीखें बाद में तय की जाएंगी। इस तरह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया एक साथ शुरू होना जरूरी नहीं है।
आयोग ने पुनरीक्षण की विभिन्न गतिविधियों के लिए समयसीमा निर्धारित की है। इसके अनुसार, नवंबर 2026 में प्रक्रिया शुरू होगी और जनवरी 2027 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद नागरिक अपने नाम और अन्य जानकारियों की जांच कर सकेंगे। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल नहीं है या उसके विवरण में कोई गलती है, तो वह निर्धारित अवधि के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेगा।
मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी के तहत मतदाता सूची तैयार करने और उसके पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारियों को निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा।
आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) के पद रिक्त न रहें। इसके साथ ही पुनरीक्षण की अवधि के दौरान आयोग की अनुमति के बिना संबंधित अधिकारियों का तबादला नहीं किया जा सकेगा।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो।
निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से मतदाता सूची में अपने नाम और अन्य जानकारियों की जांच करने की अपील की है। विशेष रूप से पहली बार मतदान करने के पात्र युवाओं को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है। आयोग का कहना है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिल सके।
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