दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई जहरीली, कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 के पार

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नई दिल्ली ,(आरएनएस)। दीपावली से ठीक पहले दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। राजधानी की हवा जहरीली हो गई है और कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार सुबह दिल्ली के कई क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। पूरी राजधानी धुंध की मोटी चादर में ढकी नजर आई। इस बीच प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण की चरणबद्ध कार्ययोजना (ग्रैप) के दूसरे चरण की पाबंदियां भी लागू हैं।आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। जहांगीरपुरी में यह स्तर 459, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में 447 और पंजाबी बाग में 446 दर्ज किया गया। ये सभी क्षेत्र गंभीर श्रेणी में पहुंच गए हैं। वहीं, इंडिया गेट और ओखला के दूसरे चरण के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक 399 दर्ज किया गया। प्रदूषण के कारण इंडिया गेट भी धुंध में पूरी तरह ओझल नजर आया।
बुधवार को दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 377 रहा, जो पिछले 288 दिनों में सबसे अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दिनभर हल्की धूप के साथ धुंध छाए रहने की संभावना है। आगामी दिनों में तापमान में और गिरावट आने का अनुमान जताया गया है।
दिल्ली की हवा बिगडऩे के प्रमुख कारणों में पड़ोसी राज्यों में धान की पराली जलाने की घटनाएं भी शामिल हैं। इस पर रोक लगाने में लापरवाही बरतने के आरोप में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब के पांच जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इनमें जालंधर, फरीदकोट, बठिंडा, बरनाला और फाजिल्का के उपायुक्त तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शामिल हैं। आयोग ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में नाकाम रहने पर अधिकारियों से जवाब मांगा है और उन्हें इस दिशा में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति को स्वास्थ्य आपातकाल जैसी गंभीर परिस्थिति बताया है। उन्होंने लोगों को सुबह और शाम के समय टहलने, दौडऩे तथा अन्य बाहरी शारीरिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी है। घर से बाहर निकलने पर एन-95 मास्क का इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सांस संबंधी बीमारियों से पीडि़त लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को घरों के भीतर भी प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाने और आवश्यकता पडऩे पर वायु शोधक यंत्र का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में लागू ग्रैप के दूसरे चरण के तहत 5 से 20 नवंबर तक धूल और प्रदूषण फैलाने वाले बाहरी निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, अस्पताल, मेट्रो और रेलवे जैसी आवश्यक परियोजनाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
इसके अलावा दिल्ली में पंजीकृत बीएस-तीन पेट्रोल और बीएस-चार डीजल श्रेणी अथवा इससे पुराने मानकों वाले वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है। वाहनों की आवाजाही कम करने के उद्देश्य से सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों का शुल्क दोगुना कर दिया गया है।
प्रदूषण और वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए सरकारी तथा निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, होटल, रेस्तरां और ढाबों में खाना पकाने के लिए कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रशासन की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन राजधानी की बिगड़ती हवा ने दीपावली से पहले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को होने की आशंका है।

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