भोपाल (ए.)। मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना में काम करने वाली हजारों महिलाओं ने चार महीने से मानदेय नहीं मिलने के विरोध में शनिवार को भोपाल में प्रदर्शन किया। नाराज महिलाएं मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शनकारियों ने बकाया राशि का भुगतान जल्द करने की मांग करते हुए सरकार को 10 नवंबर तक की समयसीमा दी। महासंघ ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन करते हुए सभी 55 जिलों में चक्काजाम किया जाएगा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि वे बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और सरकारी योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है। महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा सकती है, तो योजनाओं में काम करने वाली रसोइया बहनों और स्व-सहायता समूहों का भुगतान क्यों लंबित है। प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाया। महिलाओं ने उनके सामने अपनी समस्याएं रखीं। अधिकारियों से समाधान का भरोसा मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया। हालांकि, महासंघ ने स्पष्ट किया कि बकाया भुगतान नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ एवं रसोइया संघ, मध्यप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 16 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई की मांग की है। महासंघ के मुताबिक, सांझा चूल्हा योजना की राशि मिलने में तीन से चार महीने तक की देरी हो रही है। इससे समूहों को भोजन व्यवस्था संचालित करने में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संगठन ने मांग की है कि प्रत्येक महीने की पांच तारीख तक मानदेय और संबंधित राशि का भुगतान किया जाए। रसोइया बहनों का मासिक मानदेय 500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किया जाए तथा इस राशि की कटौती समूहों को मिलने वाली लागत से नहीं हो। लंबित भुगतान जारी करने के साथ सभी जिलों में भुगतान की निश्चित तारीख तय करने की मांग भी की गई है। महासंघ ने पोषण आहार योजना के तहत खाद्यान्न आवंटन में कमी का मुद्दा भी उठाया। संगठन का आरोप है कि पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की संख्या के अनुपात में समूहों को पर्याप्त खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। कुछ स्थानों पर जरूरत का केवल 20 से 25 प्रतिशत खाद्यान्न मिलने की शिकायत की गई है। महासंघ ने वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर पूरा खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही खाद्यान्न उठाव की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए समूह अध्यक्ष और सचिव के फिंगरप्रिंट से वितरण की व्यवस्था लागू करने तथा दुकानदारों के फिंगरप्रिंट के जरिए उठाव की मौजूदा व्यवस्था समाप्त करने की मांग रखी है।
संगठन ने भोजन और नाश्ते की निर्धारित दरों को भी महंगाई के लिहाज से अपर्याप्त बताया। महासंघ के अनुसार, नाश्ते के लिए 2.88 रुपये और भोजन के लिए 4.82 रुपये प्रति हितग्राही की दर में बढ़ोतरी की जरूरत है। महासंघ ने रसोइया बहनों की सेवा अवधि 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा वर्ष 2023 से 2026 तक जून महीने की 15 दिनों की कथित लंबित मजदूरी की जांच कर एकमुश्त भुगतान करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इससे प्रदेश की करीब 2 लाख 32 हजार रसोइया बहनों को लाभ मिल सकता है। समूहों के अध्यक्ष और सचिव को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप 1,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने तथा रसोइया बहनों को कर्मचारियों के समान दर्जा प्रदान करने की मांग भी मांगपत्र में शामिल है। महासंघ ने रसोइया बहनों, समूह अध्यक्षों और सचिवों के लिए 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन चाहता है कि लंबे समय से काम कर रही महिलाओं के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था भी लागू की जाए। इसके अलावा, समूहों को खाद्यान्न और योजना की राशि का पूरा भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है। महासंघ के अनुसार, भुगतान में देरी और संसाधनों की कमी से योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। फिलहाल प्रदर्शन के बाद अधिकारियों की ओर से मिले आश्वासन के बावजूद महासंघ ने अपना रुख स्पष्ट रखा है। संगठन की मांग है कि 10 नवंबर तक सभी लंबित भुगतान किए जाएं। ऐसा नहीं होने पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा।








