दिन में गर्मी, रात में ठंडक से बिगड़ रही सेहत,वायरल-बुखार और उल्टी-दस्त के मरीज बढ़े, एलर्जी वाले भी परेशान

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भोपाल (आरएनएस) । दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के बीच मौसम का बदलता मिजाज लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। मध्यप्रदेश से मानसून की जल्दी विदाई के बाद दिन और रात के तापमान में 13 से 16 डिग्री तक का अंतर बना हुआ है। राजधानी भोपाल के बड़े अस्पतालों की ओपीडी में वायरल, बुखार, सर्दी-खांसी और गले में खराश की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। उल्टी-दस्त के मरीज भी परेशानी बढ़ा रहे हैं। मौसम के इस उतार-चढ़ाव से एलर्जी वाले मरीजों को भी अधिक दिक्कत हो रही है। चिकित्सकों ने सुबह और रात को बाहर निकलते समय सावधानी रखने, धूल-धुएं से बचने और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने की सलाह दी है। डॉ. सुदर्शना सुल्लेरे के मुताबिक, ठंड और गर्मी के बीच तेजी से बदलते तापमान के कारण एलर्जी से परेशान लोगों की दिक्कत बढ़ रही है। ऐसे मरीजों को गले में खराश, जुकाम और लगातार नाक बहने जैसी शिकायतें हो रही हैं। उन्होंने सलाह दी कि सुबह और रात को बाहर निकलते समय नाक को ढककर रखें और मास्क का इस्तेमाल करें। तापमान में अचानक बदलाव से बचें और धूल-धुएं के संपर्क में आने से परहेज करें।
ठंडक बढऩे पर पानी पीना न करें कम
डॉ. सुल्लेरे ने कहा कि मौसम ठंडा होने के साथ कई लोग पानी कम पीने लगते हैं, जिससे परेशानी बढ़ सकती है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से पानी पिएं और जरूरत के अनुसार नारियल पानी जैसे पेय भी ले सकते हैं। उन्होंने ठंडे पेय और कोल्ड ड्रिंक का सेवन कम रखने की सलाह दी। एलर्जी या दूसरे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
दिन-रात के तापमान में 16 डिग्री तक अंतर
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों से 2 अक्टूबर को मानसून की वापसी हो चुकी है। इस बार मानसून की विदाई अपेक्षाकृत जल्दी हुई है। फिलहाल पश्चिमी मध्यप्रदेश के ज्यादातर जिलों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच 13 से 16 डिग्री तक का अंतर बना हुआ है। रात का न्यूनतम तापमान करीब 18 से 20 डिग्री के बीच चल रहा है और अगले कुछ दिनों तक इसमें बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। तापमान में इस उतार-चढ़ाव के दौरान सर्दी, खांसी और जुकाम जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, केवल दिन-रात के तापमान में अंतर को वायरल संक्रमण या दूसरी बीमारियों का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। संक्रमण के अलावा दूषित भोजन और पानी भी उल्टी-दस्त की वजह हो सकते हैं। अरुण शर्मा के मुताबिक, नवंबर के पहले सप्ताह के आसपास सुबह और देर शाम की ठंडक बढऩे लगेगी। इसके साथ ही दिन के तापमान में भी धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है। फिलहाल इस साल सर्दी कैसी रहेगी, इसे लेकर विस्तृत आकलन नहीं किया गया है।
नवंबर में मौसम के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद ही सर्दी के रुख को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आएगी।

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