सिंगापुर,09 अक्टूबर। दक्षिण-पूर्वी एशिया में जंगलों की आग और भीषण सूखे के कारण वायु प्रदूषण का संकट गहरा गया है। सिंगापुर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। स्विट्जरलैंड की संस्था आईक्यूएयर के वास्तविक समय के वायु गुणवत्ता निगरानी आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर वैश्विक प्रदूषण सूची में शीर्ष पर पहुंच गया है। देश में 24 घंटे का प्रदूषक मानक सूचकांक (पीएसआई) 200 के पार पहुंच गया है। वर्ष 2019 के बाद यह पहली बार है, जब पूरे देश में वायु गुणवत्ता इतनी खराब स्थिति में पहुंची है।
इस संकट की प्रमुख वजह पड़ोसी देश इंडोनेशिया के जंगलों और दलदली क्षेत्रों में लगने वाली आग से उठने वाला धुआं है। इसका असर सिंगापुर के साथ-साथ मलेशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है।
इंडोनेशिया के सुमात्रा और कालीमंतन द्वीपों पर ताड़ के तेल और कागज की लुगदी के लिए बड़े पैमाने पर बागान विकसित किए जाते हैं। इन क्षेत्रों में जमीन साफ करने के लिए हर साल जंगलों और दलदली भूमि में अवैध रूप से आग लगाई जाती है। इस वर्ष भी इंडोनेशिया के जंगलों में आग के सैकड़ों केंद्र सक्रिय हैं।
दक्षिण-पूर्वी मानसून की तेज हवाएं इन क्षेत्रों से उठने वाले घने धुएं को सिंगापुर की ओर ले जा रही हैं। इसके कारण वहां की हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ गई है और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है।
इस वर्ष मौसम पर अल नीनो की तीव्र स्थिति का भी प्रभाव पड़ा है। इसके कारण दक्षिण-पूर्वी एशिया के बड़े हिस्से में लंबे समय से बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। बारिश नहीं होने से वातावरण में मौजूद प्रदूषक कणों को हटने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
सिंगापुर के नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान में सहायक प्राध्यापक वांग जिंग्यू के अनुसार, जून से सिंगापुर और इंडोनेशिया में बारिश सामान्य से लगभग 80 प्रतिशत कम रही है। शुष्क मौसम और अल नीनो के संयुक्त प्रभाव ने इंडोनेशिया में जंगलों की आग को और गंभीर बना दिया है।
जंगलों की आग से उठने वाले धुएं का असर केवल सिंगापुर तक सीमित नहीं है। प्रायद्वीपीय मलेशिया, सारावाक, कालीमंतन और सुमात्रा के कुछ हिस्से भी इसकी चपेट में हैं। मलेशिया में प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने के कारण सरकार ने 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सैकड़ों स्कूलों, बालवाटिकाओं और शिशु देखभाल केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर भी दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है।
सिंगापुर की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी ने लोगों को वायु प्रदूषण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। एजेंसी के अनुसार, जब सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) का एक घंटे का स्तर अधिक हो, तो लोगों को अगले एक घंटे तक बाहरी गतिविधियां कम करनी चाहिए।
बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों तथा हृदय और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से पीडि़त लोगों को प्रदूषण का स्तर बढऩे पर बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण का प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्राध्यापक क्रिस कार्लस्टन ने भी इस संबंध में चिंता जताई है।
सिंगापुर में वायु प्रदूषण का संकट ऐसे समय में सामने आया है, जब वहां फॉर्मूला वन ग्रां प्री मोटर रेस आयोजित हो रही है। इस आयोजन में लगभग तीन लाख दर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। जहरीली हवा खिलाडिय़ों, आयोजन से जुड़े कर्मचारियों और दर्शकों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, फॉर्मूला वन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टेफानो डोमेनेकलि ने स्पष्ट किया है कि रेस निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने दर्शकों की सुरक्षा के लिए एन-95 मुखावरण और चिकित्सा सहायता केंद्रों की व्यवस्था की है।
दक्षिण-पूर्वी एशिया में बढ़ता यह प्रदूषण संकट जंगलों में आग, लंबे सूखे और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव को उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जंगलों में आग पर नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और प्रभावित क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।








