नई दिल्ली ,07 अक्टूबर ,(आरएनएस)। विदेशों में बसने की होड़ के बीच एक एनआरआई परिवार ने करीब दो दशक बाद अपनी जड़ों की ओर लौटने का बड़ा फैसला लेकर सोशल मीडिया पर सबका ध्यान खींचा है। ऑस्ट्रेलिया में लगभग 20 साल तक रहने के बाद यह परिवार हमेशा-हमेशा के लिए भारत लौट आया है। एयरपोर्ट से साझा किए गए एक भावुक वीडियो में इस जोड़े ने अपने इस जीवन-बदलने वाले फैसले और इसके पीछे की असली वजहों को उजागर किया, जो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
माता-पिता का साथ और बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोडऩा मुख्य वजह
एयरपोर्ट पर फ्लाइट पकडऩे से पहले बनाए गए वीडियो में दंपती ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया छोडऩा उनके लिए आसान नहीं था और इस देश से उन्हें जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने खुलासा किया कि ऑस्ट्रेलिया को स्थायी रूप से अलविदा कहकर स्वदेश लौटने का सबसे बड़ा कारण बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहना और उनकी सेवा करना है। इसके साथ ही वे चाहते हैं कि उनके बच्चे भारत में रहकर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक मूल्यों के करीब आएं। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने यह पहले से तय नहीं किया है कि भारत जाकर क्या काम करेंगे, क्योंकि अगर वे हर नफा-नुकसान का ज्यादा हिसाब लगाते तो शायद इतना बड़ा फैसला कभी ले ही नहीं पाते।
प्लेन से पहले ही भारत भेज दी थी पसंदीदा लाल मस्टैंग कार
इस परिवार के भारत लौटने का एक और पहलू सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा। एनआरआई लवलीन ने ऑस्ट्रेलिया में मौजूद अपनी पसंदीदा लाल रंग की फोर्ड मस्टैंग कार को बेचने या वहां किसी दोस्त को सौंपने के बजाय हवाई जहाज के जरिए पहले ही भारत भिजवा दिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो के जरिए बताया था कि परिवार की सहमति के बाद उन्होंने अपनी इस प्रिय कार को अपने साथ भारत लाने का पक्का इरादा किया।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं, फैसले की हो रही तारीफ
सोशल मीडिया पर इस दंपती के वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां बड़ी संख्या में लोगों ने इसे एक साहसी और दिल छू लेने वाला कदम बताते हुए उनका भारत में स्वागत किया और जीवन की नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं, वहीं कई अन्य यूजर्स ने पश्चिमी देशों से भारत में अचानक होने वाले जीवनशैली, शिक्षा और मेडिकल सिस्टम के बदलावों को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां भी गिनाईं। कुछ लोगों ने सलाह दी कि बच्चों और पत्नी की सुविधा को देखते हुए उन्हें शुरुआत में चंडीगढ़ या गुरुग्राम जैसे आधुनिक शहरों में बसना चाहिए। बहरहाल, 20 साल के विदेशी ऐशो-आराम को छोड़ अपनी माटी की ओर लौटने का यह फैसला लोगों के बीच प्रेरणा और चर्चा का केंद्र बना हुआ है।








