कॉल रिसीव करते ही बन गया न्यूड वीडियो, फर्जी पुलिस और जेल का खौफ दिखाकर युवक से 50 लाख रुपए की ठगी

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अहमदाबाद ,06 अक्टूबर ,(आरएनएस)। गुजरात के अहमदाबाद में डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन सेक्सटॉर्शन का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक अनजान नंबर से आए न्यूड वीडियो कॉल के जरिए जालसाजों ने 26 वर्षीय एक कामकाजी युवक को इस कदर डराया-धमकाया कि उसने अपनी गाढ़ी कमाई के करीब 50 लाख रुपये गंवा दिए। साइबर ठगों ने पहले वीडियो वायरल करने की धमकी दी और फिर दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारी बनकर गिरफ्तारी और सात साल की जेल का खौफ दिखाया। इस तरह किस्तों में युवक से कुल 49.78 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
अनजान नंबर से आया वीडियो कॉल, काटते ही शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल
घटना की शुरुआत 3 सितंबर 2026 की रात को हुई। अहमदाबाद में एक निजी कंपनी में कार्यरत पीडि़त युवक अपने घर पर मोबाइल चला रहा था। इसी दौरान उसके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल उठाते ही स्क्रीन पर एक युवती आपत्तिजनक (न्यूड) अवस्था में दिखी। घबराकर युवक ने तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट की और उस नंबर को ब्लॉक कर दिया। कुछ ही देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आई, जिसमें कॉलर ने दावा किया कि उसकी स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली गई है और यदि उसने पैसे नहीं दिए तो इसे सोशल मीडिया और उसके परिचितों में वायरल कर दिया जाएगा। उस वक्त युवक ने डर के बावजूद कॉल काट दी और भेजे गए कथित वीडियो को डिलीट कर दिया।
तीन हफ्ते बाद ‘फर्जी पुलिस अफसर’ की एंट्री, गिरफ्तारी का दिखाया खौफ
शुरुआती ब्लैकमेलिंग के करीब तीन हफ्ते शांत रहने के बाद ठगों ने अपने शातिर नेटवर्क का दूसरा चरण शुरू किया। 27 सितंबर को युवक के पास एक अज्ञात कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को ‘दिल्ली साइबर क्राइम ब्रांच का अधिकारी संजय अरोड़ा’ बताया। फर्जी अधिकारी ने युवक पर अश्लील वीडियो से जुड़े गंभीर अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो रहा है, जिसमें सात साल की जेल हो सकती है। जेल और बदनामी के डर से युवक बुरी तरह सहम गया।
यू-ट्यूब से वीडियो हटाने के नाम पर शुरू हुआ वसूली का सिलसिला
फर्जी पुलिस अधिकारी ने युवक को झांसे में लेते हुए कथित तौर पर यू-ट्यूब के अधिकारी हेमंत मल्होत्रा से उसकी बात कराई। हेमंत मल्होत्रा नाम के शख्स ने दावा किया कि युवक के दो न्यूड वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड होने के लिए कतार में हैं और इन्हें सर्वर से हमेशा के लिए डिलीट करने के लिए 71,250 रुपये का शुल्क देना होगा। अपनी साख बचाने के लिए युवक ने यह रकम तुरंत ट्रांसफर कर दी। इसके बाद ठगों का हौसला बढ़ गया और उन्होंने अलग-अलग विभागों के नाम, कानूनी फाइल बंद कराने और केस रफा-दफा करने के बहाने लगातार मोटी रकम की मांग शुरू कर दी।
करियर बर्बाद होने के डर से ट्रांसफर किए 49.78 लाख रुपये
आरोपी लगातार युवक को गिरफ्तारी, अदालती कार्रवाई और करियर पूरी तरह तबाह होने की धमकी देते रहे। मानसिक दबाव और दहशत में आकर पीडि़त अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजता रहा। इस तरह शातिर ठगों ने युवक से कुल 49.78 लाख रुपये ऐंठ लिए। जब इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी ठगों की पैसों की भूख शांत नहीं हुई और वे लगातार नए-नए बहानों से अतिरिक्त रुपयों की मांग करने लगे, तब जाकर युवक को एहसास हुआ कि वह एक संगठित साइबर गिरोह के शिकंजे में फंस चुका है।
साइबर क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज, बैंक खातों की जांच शुरू
पूरी तरह टूट चुके युवक ने आखिरकार अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की टीमें उन सभी बैंक खातों और यूपीआई आईडी की गहनता से पड़ताल कर रही हैं, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और आईपी एड्रेस के जरिए इस अंतरराज्यीय गिरोह की लोकेशन ट्रैक करने का प्रयास किया जा रहा है।

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