नई दिल्ली ,29 सितंबर ,(आरएनएस)। देश भर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के बाद चालान न भरने वाले वाहन चालकों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। शीर्ष अदालत ने लंबित ई-चालान की वसूली के लिए एक बेहद कड़ा और अनोखा सुझाव देते हुए कहा कि अगर लोग चालान का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो जुर्माने की रकम को सीधे उनके बिजली के बिल में जोड़ दिया जाए। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिजली का बिल तो लोगों को मजबूरी में भरना ही पड़ेगा, वरना उनका बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा; देश में चालान वसूली का कोई ठोस और प्रभावी रास्ता निकालना ही होगा।
सिर्फ पर्ची फाडऩा काफी नहीं, ?45,000 करोड़ की वसूली बाकी: जस्टिस पारदीवाला
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने दो टूक कहा कि केवल ई-चालान जारी करते रहने से जमीनी हालात नहीं सुधरेंगे। पुलिस लाखों चालान काटकर बैठ सकती है, लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि उन पर लगाए गए जुर्माने की वास्तविक वसूली कैसे की जाए। सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-चालान के रूप में अब तक 45,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बकाया है, जिसमें से महज 25,000 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को कागजों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत के मुताबिक काम करने की सख्त जरूरत है।
जब तक चालान न भरें, क्रष्ट रिन्यूअल और फिटनेस सर्टिफिकेट पर लगे रोक
सुप्रीम कोर्ट ने चालान दबाकर बैठने वालों पर शिकंजा कसने के लिए कई अहम दिशानिर्देश सुझाए। कोर्ट ने कहा कि जब तक वाहन चालक के सभी पुराने चालान क्लियर न हो जाएं, तब तक उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (क्रष्ट) के रिन्यूअल और डुप्लीकेट सर्टिफिकेट जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी जानी चाहिए। इसके अलावा, वाहन के ओनरशिप ट्रांसफर और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर भी तुरंत ताला लगना चाहिए, ताकि बकाएदार वाहन बेचकर या ट्रांसफर कराकर बच न सकें।
गाडिय़ां होंगी ब्लैकलिस्ट, ष्ठरु सस्पेंड और क्कष्ट पर भी लगेगी पाबंदी
अदालत ने कहा कि नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बकाएदारों के वाहनों को ‘परिवहन’ पोर्टल पर तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल पर रोक लगाने और डिफॉल्टर्स के मौजूदा लाइसेंस को सीधे सस्पेंड करने की सख्त व्यवस्था बनाई जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि बिना चालान क्लियर किए किसी भी प्रदूषण जांच केंद्र से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। सडक़ों पर वाहनों की रैंडम चेकिंग बढ़ाई जाए और अगर किसी गाड़ी पर भारी ई-चालान लंबित पाया जाता है, तो उसे मौके पर ही जब्त (सीज) करने के कड़े कदम उठाए जाएं।








