जहरीली कफ सिरप मामले में जिम्मेदारी को लेकर जीतू पटवारी ने उठाया सवाल

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भोपाल, (ए .)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्डरिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार से प्रशासनिक जवाबदेही और औषधि निगरानी व्यवस्था पर सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई और जांच के बावजूद यह स्पष्ट होना चाहिए कि संदिग्ध दवा बाजार तक कैसे पहुंची और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई।जीतू पटवारी ने शनिवार को मीडिया को जारी अपने बयान में कहा कि परासिया क्षेत्र में कोल्डरिफ कफ सिरप के सेवन के बाद बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने और मौतों का मामला सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में कम-से-कम 24 बच्चों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर घटना के बाद सरकार को जांच की प्रगति और अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
जीतू पटवारी ने कहा कि रिपोर्ट में कोल्डरिफ के नमूनों में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से बहुत अधिक पाए जाने का उल्लेख है। उनका कहना है कि यदि जांच में यह तथ्य सामने आया है तो निर्माता के साथ-साथ दवा की गुणवत्ता जांच और बाजार में निगरानी करने वाली व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।उन्होंने सवाल किया कि संबंधित क्षेत्र में दवा की बिक्री के दौरान नमूने लेने और उनकी जांच कराने की प्रक्रिया प्रभावी रूप से क्यों नहीं हो सकी। पटवारी ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उस समय संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की थी और जांच में उनकी भूमिका को किस तरह देखा गया।
जांच के बीच अधिकारी की बहाली पर सवाल
पीसीसी चीफ पटवारी ने तत्कालीन छिंदवाड़ा औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा की बहाली और दूसरी जगह पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार अधिकारी को मामले के बाद निलंबित किया गया था और विभागीय जांच शुरू हुई थी। इसके बाद 23 सितंबर के आदेश से उन्हें बहाल कर गुना में पदस्थ किए जाने को लेकर उन्होंने सरकार से बहाली के आधार और विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा, यदि विभागीय जांच अभी पूरी नहीं हुई है तो सरकार को यह बताना चाहिए कि बहाली और नई पदस्थापना का आधार क्या है। पीडि़त परिवारों और जनता के सामने पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

कफ सिरप मामले में सरकार ने पहले भी अधिकारियों पर कार्रवाई की थी। अक्टूबर 2025 की कार्रवाई में तत्कालीन ड्रग कंट्रोलर को स्थानांतरित किया गया था और संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया था। पटवारी ने कहा कि अब सरकार को यह भी बताना चाहिए कि उन विभागीय कार्रवाइयों और जांचों का अंतिम परिणाम क्या रहा।

नशीली कफ सिरप के नेटवर्क पर भी उठाए सवाल

पटवारी ने प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच का हवाला देते हुए कहा कि फर्जी फर्मों और लाइसेंस के जरिए यदि बड़े स्तर पर कारोबार हुआ है तो औषधि नियंत्रण व्यवस्था की निगरानी क्षमता की भी समीक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदेश में दवाओं की नियमित जांच के लिए पर्याप्त औषधि निरीक्षक उपलब्ध हैं या नहीं और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में जरूरी तकनीकी संसाधन तथा विशेषज्ञ स्टाफ की स्थिति क्या है।

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