वाशिंगटन,24 सितंबर। अमेरिका के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाले कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में तैनात आठ नौसैनिकों ने लंबी समुद्री तैनाती के दौरान आत्महत्या का प्रयास किया। यह जानकारी अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ ने न्यूयॉर्क की सीनेटर क्रिस्टन गिलिब्रैंड को लिखे एक पत्र में दी है। बढ़ती चिंताओं के बीच पोत पर तैनात नौसैनिकों के कल्याण को लेकर कांग्रेस में सवाल उठाए गए थे, जिसके जवाब में नौसेना ने यह जानकारी साझा की।
काओ के अनुसार, आत्महत्या का प्रयास करने वाले आठ नौसैनिकों में विमानवाहक पोत के चालक दल के सदस्य, वायु शाखा के कर्मचारी, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के कर्मी, विध्वंसक स्क्वाड्रन के कर्मचारी, साथ चल रहे विध्वंसक पोतों के नौसैनिक और विमानन स्क्वाड्रन के सदस्य शामिल थे।
करीब 5,000 चालक दल के सदस्यों को लेकर चलने वाला यूएसएस अब्राहम लिंकन नवंबर में कैलिफोर्निया से दक्षिण चीन सागर के लिए रवाना हुआ था। बाद में फरवरी में ईरान पर हुए हमलों से पहले इसे मध्य पूर्व भेज दिया गया। विमानवाहक पोत कुल 286 दिन तक समुद्र में तैनात रहा।
इसकी तैनाती मई में समाप्त होने वाली थी, लेकिन इसे कई बार आगे बढ़ाया गया। नौ महीने की तैनाती पूरी करने के बाद अगस्त में यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को भेजा गया। घर लौटने के दौरान लिंकन थाईलैंड के पटाया में भी रुका था।
अगस्त में दो सैन्य समाचार पत्रों ने यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात नौसैनिकों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इनमें जहाज से कूदने के कई प्रयासों का भी उल्लेख किया गया था।
काओ ने अपने पत्र में बताया कि मार्च में एक नौसैनिक ने जहाज से कूदने का प्रयास किया था। अगस्त में एक अन्य नौसैनिक वास्तव में समुद्र में कूद गया था, हालांकि उसे बचा लिया गया। नौसेना के अनुसार, इस पूरी तैनाती के दौरान आत्महत्या के कारण किसी नौसैनिक की मौत नहीं हुई।
यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लंबे समय तक तैनाती के दौरान आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठे थे। इससे पहले अमेरिकी नौसेना ने विमानवाहक पोत पर आपूर्ति संबंधी चुनौतियों को स्वीकार किया था, लेकिन उसने इस बात से इनकार किया था कि पोत पर व्यापक मानसिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति थी।
काओ के पत्र में पोत पर ताजे भोजन की कमी संबंधी चिंताओं को भी खारिज किया गया है। वहीं, सूत्रों की ओर से जहाज के स्नानघरों में फफूंद लगने और भोजन तथा साबुन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति कम होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई थी। इन परिस्थितियों के बीच लंबे समय तक समुद्र में तैनाती ने पोत पर काम करने वाले नौसैनिकों की स्थिति और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं।








