एसआईआर विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, बोलीं- ‘चुनाव प्रक्रिया से छेड़छाड़ देश से गद्दारी’

Join Us

वायनाड, (आरएनएस)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, तो यह देश के साथ गद्दारी के समान है। प्रियंका गांधी ने कहा कि मतदाता सूची में कथित हेरफेर और बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी चुनाव आयुक्त पर गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल होने के आरोप हैं, तो उन्हें कानूनी सुरक्षा क्यों मिलनी चाहिए। ‘13 करोड़ नाम हटाना लोकतंत्र के खिलाफ’
प्रियंका गांधी ने एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसे लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ आपराधिक कृत्य बताया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, एसआईआर के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की प्रक्रिया में ऐसे नामों के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने तथा वैध पाए जाने पर नाम बहाल करने का प्रावधान है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी मुद्दा उठाया
कांग्रेस सांसद ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि यदि चुनाव आयोग के अधिकारियों को किसी कथित गड़बड़ी की जानकारी थी और उन्होंने उसे होने दिया, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज की थी। चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं।
‘जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए’
प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को भी कथित अपराध के लिए जांच से अलग नहीं रखा जाना चाहिए।

Previous articleभाजपा ने 24 संगठन मंत्रियों को राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी, पवन राणा को दिल्ली-हरियाणा और धर्मपाल को यूपी का प्रभार
Next articleपंजाब में ईडी की कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, निगरानी के लिए वारंट अधिकारी नियुक्त; आधी रात तक चली सुनवाई