देहरादून,(आरएनएस)। उत्तराखंड की सियासत में शनिवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया। राज्य कांग्रेस में पहले से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच रावत के इस चौंकाने वाले कदम ने पार्टी आलाकमान से लेकर सियासी गलियारों तक खलबली मचा दी है। यह पूरा घटनाक्रम उनके करीबी सहयोगी और पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी के ठीक बाद सामने आया है, जहां से भारी मात्रा में कैश और सोना बरामद होने का दावा किया जा रहा है। हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा और भावुक बयान जारी करते हुए अपने इस अप्रत्याशित कदम की वजह साफ की। रावत ने स्पष्ट किया कि वह इस समय किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन पार्टी के संघर्ष पर कोई आंच न आए, इसलिए उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी और राहुल गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे में वह नहीं चाहते कि उनके किसी सहयोगी से जुड़े मामले के कारण कांग्रेस की साख पर कोई सवाल उठे।
सहयोगी पर लगे आरोपों और चुनाव के नैरेटिव पर वार
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना पर लगे आरोपों पर अविश्वास जताते हुए कहा कि मीडिया में चल रही खबरों की सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ग्राम सेवक भर्ती या ओएमआर शीट से छेड़छाड़ में कोई भी संलिप्तता पाई जाती है, तो यह उनके लिए बेहद शर्मिंदगी की बात होगी। चुनाव को लेकर सियासी तंज कसते हुए रावत ने कहा कि जब भी लोग उनसे पूछते थे कि चुनाव कब होंगे, तो वह मजाक में कहते थे कि जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी तब चुनाव होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार उनके घर पर नहीं बल्कि उनके सहयोगी के जरिए एक सोची-समझी साजिश के तहत नैरेटिव गढऩे की कोशिश की जा रही है।
भर्तियों पर सफाई और पूर्व सीएम खंडूरी का जिक्र
अपने तीन साल के कार्यकाल का बचाव करते हुए हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने युवाओं के भविष्य के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और विभिन्न भर्ती बोर्डों का गठन कर 42,000 से अधिक नियुक्तियां कराईं। आयोग के तत्कालीन चेयरमैन की नियुक्ति पर उन्होंने तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोई भी यह पहले से नहीं भांप सकता कि कौन व्यक्ति आगे चलकर गलत आचरण करेगा। रावत ने दो टूक कहा कि यदि नीतियों या चयन के फैसले में उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है तो वह प्रदेश की जनता से क्षमा मांगते हैं, मगर युवाओं के हित में उनकी मंशा हमेशा साफ थी।








