कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने के लिए राज्यों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

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मार्च 2027 तक 300 कृषि विज्ञान केंद्रों के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के उन्नयन का लक्ष्य
दिसंबर 2028 तक सभी कृषि विज्ञान केंद्रों में स्थापित होंगे उद्भवन-सह-कौशल केंद्र
नई दिल्ली, ,07 सितंबर ,(आरएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली में राज्यों की अधिक भागीदारी के माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को मजबूत करने की कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिवों के पांचवें सम्मेलन-2025 से सामने आई केवीके से संबंधित प्रमुख सिफारिशों को तेजी से लागू करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मंगी लाल जाट और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
300 कृषि विज्ञान केंद्रों का होगा उन्नयन
बैठक में वर्ष 2027 तक प्राथमिकता वाले 300 कृषि विज्ञान केंद्रों के बुनियादी ढांचे और रसद सुविधाओं के उन्नयन पर विशेष रूप से चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और समय पर सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ प्राथमिकता वाले कृषि विज्ञान केंद्रों के उन्नयन के लिए वित्तीय एवं संस्थागत सहायता जुटाने को लेकर बातचीत की है। कई राज्यों ने अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से कार्ययोजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, जबकि अन्य राज्य तैयारी और कार्यान्वयन के अलग-अलग चरणों में हैं।
सभी केवीके में उद्भवन-सह-कौशल केंद्र
बैठक में दिसंबर 2028 तक सभी कृषि विज्ञान केंद्रों में उद्भवन-सह-कौशल केंद्र स्थापित करने के लक्ष्य की भी समीक्षा की गई। इसके तहत कृषि विज्ञान केंद्रों का कृषि आधारित उद्यमों, तकनीकी भागीदार संस्थानों और जिले के अनुसार कृषि क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कृषि विज्ञान केंद्रवार योजनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि इनके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन और कार्यान्वयन संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
कर्मचारियों के वेतन और पदोन्नति में सुधार
बैठक में कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों से जुड़े सुधारों पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुधारों को व्यय विभाग से मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई।
केवीके कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में योगदान और सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने में राज्य सरकारों की भूमिका पर भी जोर दिया गया। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे खाली पदों पर समयबद्ध भर्ती करें, ताकि कृषि विज्ञान केंद्रों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हो और उनकी अनिवार्य गतिविधियां प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकें।
मौसमी कृषि गतिविधियों के लिए समय पर धन जरूरी
बैठक में विशेष रूप से मौसमी कृषि कार्यक्रमों के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों को समय पर धनराशि जारी करने के महत्व पर जोर दिया गया। कहा गया कि कृषि संबंधी गतिविधियों को उपयुक्त कृषि मौसम के भीतर ही प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
वर्ष 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन कार्यक्रम के तहत समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के माध्यम से 24 राज्यों के 353 कृषि विज्ञान केंद्रों और जिलों में गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके लिए 12,349 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 9,750 हेक्टेयर क्षेत्र हासिल किया जा चुका है।
कुछ राज्यों में धनराशि के प्रवाह और उसे जारी करने में देरी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। राज्यों से कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों तक धनराशि के सुचारू एवं समयबद्ध प्रवाह को सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।
साथ ही अनुशंसित गुणवत्ता वाले बीजों और किस्मों की समय पर उपलब्धता तथा प्रदर्शन कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन के दौरान बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका
समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे योजना के तहत अनिवार्य गतिविधियों और जिला-विशिष्ट कार्ययोजनाओं को लागू करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएं।
क्षमता विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ जिला स्तर पर केवीके की गतिविधियों की व्यापक निगरानी, रिपोर्ट तैयार करने और परिणामों के मूल्यांकन पर भी जोर दिया गया। इसके लिए निर्धारित पोर्टल पर गतिविधियों और उनके परिणामों की जानकारी समय पर अपलोड करने की आवश्यकता बताई गई।
किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने में केवीके की भूमिका
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों में बदलाव के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय, समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचा, पर्याप्त मानव संसाधन और जिला-विशिष्ट कार्ययोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और ग्रामीण समुदायों की प्रभावी ढंग से सेवा करने तथा कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग से पूरी तरह सुसज्जित हों।
उन्होंने कहा कि मजबूत कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और ग्रामीण समुदायों तक वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत किस्मों, कौशल, नवाचार और उद्यमिता के अवसरों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए तय कार्यबिंदुओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ तालमेल मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। उद्देश्य है कि कृषि विज्ञान केंद्र कृषि प्रौद्योगिकी के प्रसार, कौशल विकास, नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता के प्रभावी मंच के रूप में विकसित हों और देश के विकसित एवं समृद्ध कृषि क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दें।

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