गौहाटी विश्वविद्यालय में 110 करोड़ की अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया शैक्षणिक भवन, छात्रावास, सभागार और पुस्तकालय संबंधी कार्यों का शिलान्यास
असमिया-तमिल साहित्यिक अनुवाद भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक: उपराष्ट्रपति
युवाओं से नशे से दूर रहने, अनुशासन अपनाने और समय का सदुपयोग करने का आह्वान
गुवाहाटी, ,07 सितंबर ,(आरएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को गौहाटी विश्वविद्यालय में करीब 110 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न अवसंरचना विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं में नए बहुविषयक शैक्षणिक भवन, लडक़ों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए छात्रावास, सभागार तथा पुस्तकालय से जुड़े विभिन्न विकास कार्य शामिल हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने गौहाटी विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई सहित अनेक प्रख्यात नेताओं के नेतृत्व में चले निरंतर जनआंदोलन के बाद 26 जनवरी 1948 को पूर्वोत्तर भारत के पहले विश्वविद्यालय के रूप में गौहाटी विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद से ए प्लस मान्यता हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा-2025 की सार्वजनिक विश्वविद्यालय श्रेणी में नौवां स्थान प्राप्त कर क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
भाषाई विरासत के संरक्षण पर जोर
उपराष्ट्रपति ने देश की भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में गौहाटी विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी सभ्यता की स्मृति, ज्ञान और पहचान को अपने भीतर समाहित करती है।
उन्होंने असमिया और तमिल साहित्यिक कृतियों के परस्पर अनुवाद का स्वागत करते हुए असम और तमिलनाडु के बीच अधिक अकादमिक एवं साहित्यिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सांस्कृतिक एकता को और अधिक समृद्ध बनाती है।
श्री राधाकृष्णन ने ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन, लुप्तप्राय भाषाओं, बहुभाषावाद, महिला अध्ययन, पर्यावरणीय स्थिरता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों जैसे विषयों पर विश्वविद्यालय में किए जा रहे शोध की भी सराहना की। उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी को पारिस्थितिक, आर्थिक और सभ्यतागत शक्ति बताते हुए क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
उच्च शिक्षा के विस्तार में प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना
उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशभर में नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना से विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अवसरों का विस्तार हुआ है।
उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढक़र 2.24 करोड़ हो गया। यह करीब 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी उपलब्धियां महिला सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
असम की प्रगति की सराहना
उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व सरमा के नेतृत्व में असम में हुए विकास कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य ने अवसंरचना, संपर्क व्यवस्था, शिक्षा, निवेश और रोजगार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने राज्य की बेहतर होती शिक्षा व्यवस्था, भारतीय प्रबंधन संस्थान गुवाहाटी में प्रबंधन में स्नातकोत्तर के पहले बैच की शुरुआत और वर्ष 2021 से अब तक 1.64 लाख से अधिक योग्यता आधारित सरकारी नियुक्तियों का उल्लेख किया।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान का आह्वान
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों और विद्वानों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से बड़े और साहसिक लक्ष्य निर्धारित करने, समाज की चुनौतियों का समाधान करने वाले शोध को बढ़ावा देने तथा प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवता की सेवा के लिए करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि नवाचार को समावेशी विकास का माध्यम बनाया जाना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से कहा, जागो, उठो और अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक मत रुको।
भूपेन हजारिका और असमिया शब्दकोश पर पुस्तकों का विमोचन
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने अंकुरण दत्त और ननी गोपाल महंत द्वारा संपादित ‘भूपेन हजारिका: एक विचरण गीत के सौ वर्ष’ तथा ‘चंद्रकांत अभिधान’ के पांचवें संशोधित एवं विस्तारित संस्करण का विमोचन किया।
उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कार्यक्रम में असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की झलक देखने को मिली।
युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों और कार्यक्रम में मौजूद अन्य प्रतिभागियों को “नशीली दवाओं को ना” कहने की शपथ दिलाई। उन्होंने युवाओं से मादक पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहने, आत्म-अनुशासन अपनाने और समय का सदुपयोग करने की अपील की।
उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपना समय शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण जैसे रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहिए।
कार्यक्रम में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व सरमा, शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, गौहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति ननी गोपाल महंत, कुलसचिव प्रो. उत्पल सरमा, विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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