यूपी समेत 5 राज्यों में चुनावी बिगुल जल्द! जनगणना के फैसले से फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव के संकेत

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नई दिल्ली ,07 सितंबर ,(आरएनएस)। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में जनगणना का काम आगे बढ़ाने तथा मणिपुर में जनगणना के पहले चरण को टालने के केंद्र के फैसले से इन पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश समेत पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में कराए जा सकते हैं।
इन पांच राज्यों में सबसे पहले मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को समाप्त होगा। इसके बाद गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च, पंजाब का 16 मार्च और उत्तराखंड का 18 मार्च को खत्म होगा। वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा।
2022 में भी इन पांचों राज्यों में लगभग एक साथ विधानसभा चुनाव हुए थे। हालांकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 22 मई 2022 को हुई थी। ऐसे में 2027 में भी चुनाव आयोग द्वारा पांचों राज्यों में एक साथ चुनाव कराने की संभावना है। आयोग की परंपरागत व्यवस्था के मुताबिक सबसे पहले समाप्त होने वाली विधानसभा यानी मणिपुर का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है।
इस स्थिति में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव उसके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति से करीब दो महीने पहले हो सकते हैं। यह पिछले तीन विधानसभा चुनावों के पैटर्न के अनुरूप भी होगा। संवैधानिक प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग किसी राज्य में विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले तक चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बड़ी आबादी और मतदाताओं की संख्या को देखते हुए कई चरणों में मतदान कराए जाने की संभावना है। हालांकि, बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा अपनाए गए हालिया तौर-तरीकों को देखते हुए चरणों की संख्या पहले की तुलना में कम रखी जा सकती है। यदि उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह मतदान को दो चरणों तक सीमित किया जाता है, तो चुनावी प्रक्रिया फरवरी या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकती है।
चुनाव वाले पांच राज्यों में से तीन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्ढ्ढक्र) का काम पूरा हो चुका है, जबकि दो राज्यों में यह प्रक्रिया जारी है। ऐसे में विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले चुनाव आयोग द्वारा इन राज्यों में दोबारा स्ढ्ढक्र कराने की संभावना कम मानी जा रही है।
स्ढ्ढक्र के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 13.4 करोड़ रह गई है, जो करीब 13.2 प्रतिशत की कमी है। वहीं, गोवा में मतदाताओं की संख्या 10.6 लाख यानी करीब 10.2 प्रतिशत कम हुई है। मणिपुर में मतदाताओं की संख्या 19.3 लाख रह गई, जिसमें करीब 7.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची अगले कुछ महीनों में जारी होने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के बर्फ से मुक्त क्षेत्रों और गोवा में जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना चरण को 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच कराने का फैसला किया है। इसके लिए 5 जनवरी 2027 को संदर्भ तिथि माना गया है। वहीं, मणिपुर में जनगणना के हाउस-लिस्टिंग चरण को टाल दिया गया है।
चुनाव वाले चार राज्यों में जनसंख्या गणना का चरण पहले कराने का उद्देश्य जनगणना और विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच संभावित टकराव से पैदा होने वाली प्रशासनिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों से बचना है। दोनों ही बड़े अभियानों के संचालन के लिए सरकारी कर्मचारियों, खासकर शिक्षकों की बड़ी संख्या में आवश्यकता होती है। ऐसे में चुनाव और जनगणना एक साथ होने पर कर्मचारियों की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती थी।
आमतौर पर जनगणना का दूसरा चरण फरवरी में पूरे देश में कराया जाता है, जिसमें 1 मार्च को संदर्भ तिथि माना जाता है। लेकिन चुनावी राज्यों के लिए समय-सारिणी में बदलाव कर केंद्र ने चुनाव और जनगणना के बीच संभावित टकराव को कम करने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में ही कराए जा सकते हैं।

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