नई दिल्ली (ए)। देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक पद छोडऩे के एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन वह अब तक अपने हक के सरकारी आवास से महरूम हैं। संवैधानिक नियमों के तहत पूर्व उपराष्ट्रपति को जीवनभर के लिए लुटियंस दिल्ली में सर्वसुविधायुक्त टाइप-8 बंगला मिलने का कानूनी अधिकार है। इसके बावजूद जगदीप धनखड़ को अब तक सरकार की तरफ से कोई सरकारी बंगला आवंटित नहीं हुआ है और वह एक निजी फार्महाउस में दिन गुजारने को मजबूर हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, जगदीप धनखड़ फिलहाल दिल्ली के छतरपुर स्थित इंडियन नेशनल लोकदल (ढ्ढहृरुष्ठ) के नेता अभय सिंह चौटाला के निजी फार्महाउस में रह रहे हैं। पद छोडऩे के करीब छह हफ्ते बाद 1 सितंबर 2025 को वह इस फार्महाउस में शिफ्ट हुए थे। उस वक्त इसे महज कुछ दिनों की अस्थायी व्यवस्था माना जा रहा था, लेकिन पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस पूरे मसले पर धनखड़ के कार्यालय की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उपराष्ट्रपति पेंशन और आवास नियमों के तहत पूर्व उपराष्ट्रपति को जीवनभर के लिए देश में अपनी पसंद के किसी भी शहर में बिना किसी किराए, बिजली और पानी के शुल्क के टाइप-8 श्रेणी का सुसज्जित सरकारी बंगला पाने का कानूनी हक है। यदि निर्धारित स्थान पर ऐसा बंगला उपलब्ध न हो, तो सरकार 2,000 वर्ग फुट का आवास लीज पर लेकर देने के लिए बाध्य होती है धनखड़ से पहले पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को भी रिटायरमेंट के तुरंत बाद दिल्ली के 1, त्यागराज मार्ग स्थित विशाल बंगला आवंटित किया गया था। धनखड़ के मामले में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय और संपदा निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि उनकी तरफ से आवास आवंटन के लिए कोई औपचारिक आवेदन या अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से भी इस पर कोई बयान नहीं आया है।
चर्च रोड एनक्लेव से फार्महाउस तक का सफर
जगदीप धनखड़ देश के पहले ऐसे उपराष्ट्रपति थे, जिन्होंने चर्च रोड पर बने भव्य नए उपराष्ट्रपति एनक्लेव में निवास किया था। उन्होंने 21 जुलाई 2025 को अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। हालांकि उनके इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर सियासी गलियारों में भारी घमासान मचा था, क्योंकि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच समिति गठित करने के विपक्षी नोटिस को स्वीकार कर लिया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि उनसे दबाव डालकर इस्तीफा लिया गया था। पद छोडऩे के बाद से ही वह सियासत की चकाचौंध से दूर फार्महाउस में जीवन बिता रहे हैं।








