– व्यापारियों ने हंगामा करते पक्षपात का लगाया आरोप
भोपाल, (ए.)। उच्चतम न्यायालय की सख्ती के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम ने बड़े पैमाने पर सीलिंग कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को हुई कार्रवाई में महज 4 घंटों में 15 से अधिक प्रतिष्ठानों को बंद करा दिया गया। वहीं, अरेरा कॉलोनी सहित कई इलाकों में व्यापारियों ने जमकर हंगामा करते हुए निगम पर छोटे कारोबारियों को निशाना बनाने और बड़े मॉल्स को छोडऩे का आरोप लगाया।राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सोमवार सुबह 9 बजे से नगर निगम का कड़ा चाबुक चला। उच्चतम न्यायालय के सख्त निर्देशों के अनुपालन में शुरू हुई इस कार्रवाई से पूरे शहर के व्यापारियों में हडक़ंप मच गया। नगर निगम की टीमों ने अलग-अलग पुलिस थानों के भारी बल के साथ मैदान संभालते हुए महज 4 घंटे की भीतर सर्वधर्म, अरेरा कॉलोनी, रचना नगर और खानूगांव जैसे पॉश इलाकों में 15 से अधिक प्रतिष्ठानों को सील और बंद करा दिया। कार्रवाई के दौरान सबसे अधिक तनाव ई-3 अरेरा कॉलोनी और आर्य समाज मंदिर के पास देखने को मिला। जब निगम अमला दुकानें बंद कराने पहुँचा, तो स्थानीय कारोबारियों का गुस्सा फूट पड़ा। व्यापारियों ने सीधे तौर पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन सिर्फ छोटे दुकानदारों को बलि का बकरा बना रहा है, जबकि बड़े रसूखदारों और शॉपिंग मॉल्स पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
हंगामे और उग्र विरोध के चलते निगम अधिकारियों को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा।
10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, “व्यापारी सडक़ पर आ गए हैं और रोने जैसी नौबत है। यदि सरकार समय रहते भोपाल का मास्टर प्लान लागू करती या मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था बनाती, तो आज 90त्न व्यापार ठप्प होने की कगार पर न पहुँचता।”
याचिकाकर्ता बोले- ‘दिखावे की कार्रवाई’
मामले को शीर्ष अदालत तक ले जाने वाले याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने भी निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निगम केवल खानापूर्ति कर रहा है और रसूखदारों को अभयदान दे रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की इस अधूरी और चयनात्मक कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट 15 सितंबर को उच्चतम न्यायालय के समक्ष रखी जाएगी।
मास्टर प्लान की विफलता और रहवासियों का पक्ष
अर्बन प्लानिंग विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल के मास्टर प्लान में सालों की देरी इस संकट की मुख्य वजह है। दूसरी ओर, आवासीय क्षेत्रों के रहवासियों का कहना है कि अवैध कमर्शियल गतिविधियों से कॉलोनियों में शोर, ट्रैफिक जाम, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और स्कूली बच्चों के लिए हादसे का खतरा लगातार बढ़ रहा था।
अन्य इलाकों में फैला खौफ, भारी पुलिस बल तैनात
कार्रवाई के दौरान उत्पन्न हुए जनाक्रोश को देखते हुए मिसरोद, हबीबगंज, गोविंदपुरा और कोलार सहित 7 थानों की पुलिस तैनात की गई है। निगम प्रशासन अब मुख्य मार्गों, नदी-तालाब के कैचमेंट एरिया, ग्रीन बेल्ट और अवैध मैरिज गार्डनों पर भी जांच का दायरा बढ़ाने जा रहा है। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद अशोका गार्डन, अवधपुरी और लालघाटी जैसे इलाकों के कारोबारियों में भी अफरा-तफरी का माहौल है और वे वैकल्पिक जगहों की तलाश में जुट गए हैं।








