-पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा,मध्य भारत में भी भारी वर्षा की चेतावनी
नई दिल्ली, (आरएनएस)। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सितंबर की शुरुआत में देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय बना रहेगा। 31 अगस्त से 5 सितंबर के बीच कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण जलभराव, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
फिलहाल देश के मौसम पर उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र का प्रभाव बना हुआ है। इसके अलावा मानसून की अक्षीय रेखा और अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाएं भी वर्षा के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रही हैं। इन मौसमी प्रणालियों के कारण देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में बादल बनने और बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी घाट के प्रभाव से पश्चिमी तट पर भी वर्षा का दौर जारी रहने की उम्मीद है।हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर के बीच व्यापक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। पश्चिमी राजस्थान में भी 3 से 5 सितंबर के बीच बारिश हो सकती है।पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और नैनीताल जैसे क्षेत्रों में वर्षा से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इन क्षेत्रों में 31 अगस्त से 2 सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। शिमला सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। शिमला मौसम केंद्र ने 3 सितंबर तक कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। बिलासपुर, कुल्लू और मंडी विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर सडक़ें बंद होने की स्थिति बन गई है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी, बारामूला और कुपवाड़ा जैसे क्षेत्रों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में नमी से भरी मानसूनी हवाओं के पहाड़ों से टकराने के कारण वर्षा होती है। लगातार बारिश से पहाड़ी ढलान कमजोर हो जाते हैं, जिससे भूस्खलन, सडक़ अवरुद्ध होने और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
मध्य भारत में भी मौसम की सक्रिय प्रणाली का प्रभाव बना रहेगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 5 सितंबर तक बारिश होने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी वर्षा का दौर जारी रह सकता है।
छत्तीसगढ़ में बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। राज्य के कुछ हिस्सों में पहले से ही बारिश के कारण स्थिति गंभीर है। सिंगरौली में भारी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि मंडला और सतना के चित्रकूट सहित कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।
ओडिशा में 31 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। झारखंड में 2 सितंबर तक कई क्षेत्रों में व्यापक वर्षा हो सकती है। बिहार में 1 से 5 सितंबर के बीच बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जिसमें कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी हो सकती है।
गंगा के मैदानी क्षेत्रों वाले पश्चिम बंगाल में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक बारिश होने की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 2 सितंबर तक वर्षा का दौर जारी रह सकता है। इसके पीछे बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र और समुद्र से लगातार आने वाली नमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर भारत में भी सितंबर की शुरुआत बारिश के साथ होने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर अच्छी बारिश हो सकती है।
31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच इन राज्यों में गरज-चमक, आंधी और बिजली गिरने की भी आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।
पश्चिम भारत में कोंकण और गोवा में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक व्यापक वर्षा होने की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 2 से 5 सितंबर के बीच बारिश हो सकती है। मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ में भी अलग-अलग स्थानों पर वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
गुजरात में मानसून सक्रिय होने के बावजूद वर्षा का वितरण असमान बना हुआ है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 34 जिलों में से 11 जिलों में करीब 50 से 51 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। अगस्त में राज्य में 96.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो चार मानसूनी महीनों में सबसे अधिक रही, लेकिन हाल के वर्षों में अगस्त के कम वर्षा वाले महीनों में इसका आंकड़ा शामिल है।
वर्षा का असमान वितरण कृषि और जल उपलब्धता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पश्चिमी तट पर अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाओं और पश्चिमी घाट के प्रभाव से बारिश जारी रहने की संभावना है।
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में बारिश होने की संभावना है।
तेलंगाना में 5 सितंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। केरल, माहे और लक्षद्वीप में पूरे सप्ताह अच्छी वर्षा होने की संभावना है। कुछ तटीय क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए भी चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों में समुद्र की स्थिति खराब रहने की आशंका है। तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, श्रीलंका के आसपास के समुद्री क्षेत्र, अंडमान सागर और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर सितंबर की शुरुआत में देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने वाला है। बारिश से सूखे क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन जिन इलाकों में पहले से बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की समस्या बनी हुई है, वहां स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, जलभराव वाले रास्तों से बचने तथा पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से परहेज करने की सलाह दी गई है।
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