नई दिल्ली, (आरएनएस)। बदलते मौसम के बीच राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी सामने आई है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 12 अगस्त तक एच1एन1 के 1,449 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि में सामने आए 229 मामलों की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। अकेले 11 अगस्त को 63 नए मामले सामने आए। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संक्रमण का असर आम लोगों के साथ-साथ चिकित्सकों पर भी दिखाई दे रहा है। कई चिकित्सकों और एक सरकारी अस्पताल के प्रमुख के भी एच1एन1 से संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम और सांस से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा है कि दिल्ली सरकार के अस्पताल स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। राम मनोहर लोहिया अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल में संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए विशेष एवं अलग वार्ड बनाए गए हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। हालांकि, फिलहाल स्थिति गंभीर स्तर तक नहीं पहुंची है। चिकित्सकों ने लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर उपचार लेने की सलाह दी है।
चिकित्सकों ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीडि़त लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।सर्दी-जुकाम, बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श करने की सलाह दी गई है। संक्रमण की आशंका होने पर समय पर जांच और उपचार से जटिलताओं से बचा जा सकता है।दिल्ली में एच1एन1 का संक्रमण पहले भी गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2019 में राजधानी में एच1एन1 के 3,637 मामले दर्ज किए गए थे और संक्रमण के कारण 31 लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में मौजूदा बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की तैयारियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
एच1एन1 इन्फ्लुएंजा विषाणु से होने वाला श्वसन संक्रमण है। इसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती स्वरूप से जुड़े विषाणु सूअरों में पाए जाते थे। अप्रैल 2009 में इस संक्रमण की पहचान सबसे पहले मेक्सिको में हुई थी और इसके बाद यह दुनिया के कई देशों में फैल गया। भारत में उस समय संक्रमण के कारण 1,500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
एच1एन1 संक्रमण में सामान्य तौर पर खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द भी हो सकता है।
चिकित्सकों का कहना है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी शिकायत होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बदलते मौसम में भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना, स्वच्छता का ध्यान रखना और बीमारी के लक्षण होने पर दूसरों से उचित दूरी बनाए रखना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मददगार हो सकता है।
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