सुप्रीम कोर्ट ने सुखबीर सिंह बादल की याचिका खारिज की, आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर रोक से इनकार

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नई दिल्ली (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। बादल ने अपने खिलाफ दर्ज मानहानि की शिकायत को चुनौती देते हुए कार्यवाही समाप्त करने की मांग की थी। यह मामला ‘अखंड कीर्तनी जत्था’ को प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ से कथित तौर पर जोडऩे संबंधी आरोपों से जुड़ा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने की। बादल की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने संबंधित व्यक्ति को कभी भी अखंड कीर्तनी जत्था का प्रवक्ता नहीं बताया था और इसलिए उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही आगे नहीं बढऩी चाहिए।
हालांकि, पीठ ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उसमें पेश की गई सामग्री का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने शिकायत में उद्धृत कुछ समाचार पत्रों की खबरों का उल्लेख किया। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सुखबीर सिंह बादल ने संबंधित व्यक्ति को अखंड कीर्तनी जत्था का प्रवक्ता बताया था।
बादल के वकील ने इन समाचार रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब खबर लिखने वाले पत्रकारों से गवाह के तौर पर पूछताछ नहीं की गई है, तो ऐसी खबरों को साक्ष्य के रूप में किस हद तक स्वीकार किया जा सकता है।
पीठ ने हालांकि शिकायत में मौजूद अन्य सामग्री की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसके आधार पर यह आरोप सामने आता है कि बादल संबंधित व्यक्ति को जानते थे और उसे संगठन का प्रवक्ता बताते थे।
सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि मामले में परेशानी यह है कि बादल संबंधित व्यक्ति को पहचानते हैं और उन्हें प्रवक्ता बताते हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बादल की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उनके खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को समाप्त करने की मांग भी स्वीकार नहीं की गई।
यह विवाद वर्ष 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सामने आया था। संबंधित व्यक्ति ने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
मामले में आरोप लगाया गया था कि बादल के बयान से अखंड कीर्तनी जत्था और संबंधित व्यक्ति को प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जोडऩे की धारणा बनी, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले के बाद अब बादल के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही जारी रहेगी।

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