संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, दोनों सदनों से 12 विधेयक पारित

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25 दिनों में हुईं 19 बैठकें, लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की करीब 39 प्रतिशत रही
नई दिल्ली, (आरएनएस)। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र की शुरुआत 20 जुलाई, 2026 को हुई थी। कुल 25 दिनों की अवधि में संसद के दोनों सदनों की 19 बैठकें हुईं। सत्र के दौरान लोकसभा में 11 विधेयक और राज्यसभा में दो विधेयक पुर:स्थापित किए गए। लोकसभा ने 12 और राज्यसभा ने भी 12 विधेयक पारित किए। दोनों सदनों द्वारा कुल 12 विधेयक पारित किए गए।
दो अध्यादेशों को विधेयकों में बदला गया
मानसून सत्र से पहले राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित दो अध्यादेशों—सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 और आय-कर (संशोधन) अध्यादेश, 2026—को प्रतिस्थापित करने तथा उनके प्रावधानों को शामिल करने वाले विधेयकों पर दोनों सदनों में विचार किया गया और उन्हें पारित किया गया।
वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों पर भी विचार किया गया। इससे संबंधित विनियोग विधेयक 4 अगस्त को लोकसभा में पुन:स्थापित, विचारित और पारित किया गया तथा 6 अगस्त को राज्यसभा ने इसे वापस कर दिया। विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को जांच और रिपोर्ट के लिए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया।
लोक परीक्षाओं की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
लोक परीक्षाओं से जुड़े विद्यार्थियों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पुन:स्थापित किया गया। इसका उद्देश्य वर्ष 2024 के मूल अधिनियम में संशोधन कर लोक परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। विधेयक में अपराधों की त्वरित जांच और समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को विशेष त्वरित न्यायालय स्थापित करने तथा विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। जांच को दो महीने और सुनवाई को तीन महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान भी इसमें रखा गया है।इसके अलावा केंद्र सरकार को आवश्यकता पडऩे पर जांच के लिए विशेष कार्यबल गठित करने में सहायता देने, अपराधों के लिए सजा बढ़ाने और उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष समयबद्ध अपीलीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त कर चुका है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयकराष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन कर वंदे मातरम् को अधिनियम की धारा 3 के दायरे में लाना है। इसमें जानबूझकर वंदे मातरम् गाने से रोकने या इसे गा रही सभा में जानबूझकर व्यवधान पैदा करने को अपराध के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण संशोधन विधेयक
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से वर्ष 1969 के मूल अधिनियम में संशोधन कर देर से जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त और सत्यापन आधारित बनाने का प्रयास किया गया है।
विधेयक के अनुसार, एक वर्ष के बाद और दो वर्ष तक पंजीकरण के लिए सक्षम कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी तथा दो वर्ष के बाद पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने का प्रावधान
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य वर्ष 2006 के अधिनियम में संशोधन कर एमएसएमई के नि:शुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय डिजिटल मंच उपलब्ध कराना है।
विधेयक में वित्त तक पहुंच बेहतर बनाने, सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के विलंबित भुगतान से जुड़े विवादों का तेजी से निपटारा करने और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए हैं। कुछ उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाने तथा जुर्माने की जगह क्रमिक दंड व्यवस्था लागू करने का भी प्रावधान है।
बैंकिंग अभिलेखों के लिए तकनीक-तटस्थ कानूनी ढांचा
बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 में ‘बैंककार बही’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है, ताकि बैंकों द्वारा रखे जाने वाले भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, आभासी और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड सहित सभी प्रकार के अभिलेख इसके दायरे में आ सकें।
विधेयक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के सत्यापन और प्रमाणन को मान्यता देते हुए बैंकिंग क्षेत्र के लिए व्यापक और भविष्य के अनुरूप कानूनी ढांचा उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 में संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने और संविधान की पहली अनुसूची में आवश्यक संशोधन करने का प्रस्ताव है।
सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इसमें खाद्य पदार्थों की परिभाषा का विस्तार, औद्योगिक वस्तुओं पर लागू भौगोलिक प्रतिबंधों को हटाने तथा सहकारी क्षेत्र के लिए कानूनी और परिचालन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के प्रावधान शामिल हैं।
विधेयक का उद्देश्य अधिकृत संस्थाओं से ऋण और अन्य आवश्यक जानकारी जुटाने तथा साझा करने में सुविधा प्रदान करना और सहकारी विकास के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
अधिकरणों में सुधार के लिए नया ढांचा
अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 का उद्देश्य विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति, सेवा शर्तों और नियमों में सुधार करना है। इसमें अधिकरणों के प्रशासन और कामकाज में दक्षता, स्वायत्तता, पारदर्शिता और एकरूपता लाने तथा राष्ट्रीय अधिकरण आयोग स्थापित करने का प्रस्ताव है।
खनिज क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता पर जोर
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से वर्ष 1957 के अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य खनिज क्षेत्र में वित्तीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमेयता लाना है, ताकि आर्थिक विकास को गति मिले तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सके।
लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत, राज्यसभा करीब 39 प्रतिशत
मानसून सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही अपेक्षित स्तर पर नहीं चल सकी। लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता लगभग 39 प्रतिशत रही।
इसके बावजूद दोनों सदनों ने विभिन्न विधायी कार्यों को पूरा किया और कुल 12 विधेयकों को पारित किया। सत्र के समापन के साथ संसद का मानसून सत्र 2026 अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया।
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