नईदिल्ली,(आरएनएस)। भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मंगलवार को उस समय अचानक तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब बांग्लादेशी ग्रामीणों के एक समूह ने पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में खेतों में काम कर रहे दो भारतीय किसानों को कथित तौर पर जबरन उठाकर बांग्लादेश ले गया। दोनों किसानों को बाद में बांग्लादेश के सीमा रक्षक बल के हवाले कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही सीमा सुरक्षा बल और सीमा रक्षक बांग्लादेश के अधिकारियों के बीच तत्काल बैठक हुई। इसके बाद तीनों नागरिकों की अदला-बदली कर उन्हें सुरक्षित रिहा कराया गया।बताया गया है कि घटना की शुरुआत मंगलवार सुबह बांग्लादेश के मेहेरपुर जिले में इच्छाखाली सीमा चौकी के पास हुई। बांग्लादेशी ग्रामीणों के अनुसार, एक 70 वर्षीय किसान अपनी फसल पर कीटनाशक का छिडक़ाव करने के लिए सीमा क्षेत्र के निकट गया था। सीमा क्षेत्र से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोप में सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने उसे हिरासत में ले लिया।
किसान की हिरासत की खबर फैलते ही उसके रिश्तेदार और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल से किसान को छोडऩे का आग्रह किया, लेकिन जब तत्काल रिहाई नहीं हुई तो कुछ ग्रामीण आक्रोशित हो गए।
आरोप है कि इसके बाद बांग्लादेशी ग्रामीणों का एक समूह अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस आया। वहां खेतों में काम कर रहे दो भारतीय किसानों को उन्होंने कथित तौर पर जबरन पकड़ लिया और बांग्लादेश ले गए।
अपहृत किसानों की पहचान नारायण देब और सचिन कर्मकार के रूप में बताई गई है। दोनों को बांग्लादेश ले जाने के बाद सीमा रक्षक बांग्लादेश के हवाले कर दिया गया। इस घटनाक्रम से सीमा पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
स्थिति को बिगडऩे से रोकने के लिए मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा की शून्य रेखा पर दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के अधिकारियों के बीच तत्काल बैठक बुलाई गई। बैठक में किसानों को सुरक्षित वापस लाने और स्थिति को सामान्य करने पर चर्चा हुई।
बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के बटालियन कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल नजमुल हसन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बांग्लादेशी किसान को सीमा रक्षक बांग्लादेश को सौंप दिया गया। इसके बदले भारतीय किसानों को सुरक्षित सीमा सुरक्षा बल के हवाले किया गया। इस तरह तीनों नागरिकों की अदला-बदली के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
घटना ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसानों के खेत कई जगह सीमा रेखा के बेहद करीब हैं, जिसके कारण दोनों देशों के ग्रामीणों के बीच पहले भी विवाद की स्थिति पैदा होती रही है। ऐसे मामलों में मामूली विवाद के बड़े तनाव में बदलने की आशंका बनी रहती है।
मंगलवार की घटना के बाद सीमा सुरक्षा बल और सीमा रक्षक बांग्लादेश के बीच समन्वय के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया। अधिकारियों की कोशिश रही कि विवाद को आगे बढऩे से रोका जाए और दोनों देशों के नागरिकों को सुरक्षित वापस भेजा जाए।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर भारतीय किसान को जबरन बांग्लादेश ले जाने की यह पहली घटना नहीं बताई जा रही है। इससे पहले पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। बीते शनिवार को जलपाईगुड़ी के किसान दीपंकर गोप को कथित तौर पर करीब 20 बांग्लादेशी नागरिकों ने पकड़ लिया था और उसे खींचकर बांग्लादेश के पंचगढ़ जिले की ओर ले गए थे।
बताया गया कि छह अगस्त को भारत में सीमा पर लगी बाड़ काटकर अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को सीमा सुरक्षा बल द्वारा पकड़े जाने के विरोध में भारतीय किसान को कथित तौर पर बांग्लादेश ले जाया गया था।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा और सीमा क्षेत्र में रहने वाले किसानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच समन्वय के बावजूद स्थानीय स्तर पर होने वाले ऐसे विवादों को रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है।








