पीएलआई-ऑटो स्कीम के तहत आया 44,326 करोड़ रुपए का निवेश; 67,000 से ज्यादा रोजगार सृजित: सरकार

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नई दिल्ली ,05 अगस्त ,। केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स क्षेत्र में निवेश और रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। भारी उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि 31 मार्च 2026 तक इस योजना के तहत 44,326 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ है, जबकि 67,820 लोगों को रोजगार मिला है।
मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के चलते ऑटोमोबाइल क्षेत्र में वित्त वर्ष 2020 को आधार वर्ष मानते हुए 52,414 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिक्री (इंक्रीमेंटल सेल्स) दर्ज की गई है। इसके अलावा, पात्र कंपनियों को अब तक 2,386.36 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है।
देश भर में लागू की गई पीएलआई-ऑटो स्कीम का उद्देश्य उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीकों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक ऑटो वैल्यू चेन में भारत की स्थिति को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यह योजना भारत को ऑटोमोबाइल विनिर्माण के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
मंत्रालय ने बताया कि योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए कंपनियों को कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) सुनिश्चित करना अनिवार्य है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और देश में विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
28 जुलाई 2026 तक 18 कंपनियों को डीवीए प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। ये प्रमाणपत्र 155 एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (एएटी) उत्पादों और उनके विभिन्न संस्करणों को कवर करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय ऑटो उद्योग नई तकनीकों के विकास और स्थानीय उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के मुद्दे पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए फिलहाल कोई अलग राष्ट्रीय चरणबद्ध नीति नहीं बनाई गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों या इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने से जुड़े प्रभावों पर कोई अलग अध्ययन नहीं कराया है।
हालांकि, सरकार ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्रालय का कहना है कि इस दिशा में जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए कई प्रकार के कच्चे माल के उपयोग की अनुमति दी गई है, जिनमें गन्ना-आधारित उत्पाद, मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटा हुआ चावल, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अनाज और राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (एनबीसीसी) द्वारा अनुमोदित अधिशेष खाद्यान्न शामिल हैं।
सरकार कम पानी वाली फसलों, विशेष रूप से मक्का, की खेती को भी बढ़ावा दे रही है ताकि एथेनॉल उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके। इस उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2024 में गठित एक विशेषज्ञ समिति ने एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न फसलों की जल आवश्यकता का अध्ययन किया था। सरकार फिलहाल

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