भोपाल में रेसीडेंसियल यानी, आवासीय भवनों के कमर्शियल उपयोग पर सुनवाई आज

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भोपाल (आरएनएस)। शहर के कई इलाकों में आवासीय प्रॉपर्टी पर सालों से कमर्शियल गतिविधियां की जा रही हैं। इसे लेकर अरेरा कॉलोनी सहित अनेक आवासीय क्षेत्र के रहवासी आवासीय भूखंडों पर हो रहे व्यावसायिक निर्माण एवं व्यवसायों के विरुद्ध शिकायत कर रहे थे। रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सख्ती की है। ऐसे में निगम को कार्रवाई करने के लिए मैदान में उतरना पडा। दो दिन में कई प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया। कइयों ने निगम की कार्रवाई के बाद स्वैच्छा से दुकानें बंद कर दी थी। हालांकि, रविवार शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में मीटिंग हुई थी। जिसमें फिलहाल व्यापारियों को राहत देने का फैसला किया गया था। बैठक में मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। साथ ही मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई , आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश कौशलेंद्र विक्रम सिंह, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, निगम कमिश्नर संस्कृति जैन भी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर पूरे प्रकरण की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद सोमवार को अधिकांश दुकानें फिर से खुल गईं।
निगम ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, प्रतिष्ठान पुन: खुलना भी गलत
अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने जिन अवैध दुकानों को सील करने का नोटिस जारी किया था, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।
विधायक बोले-भोपाल का मास्टर प्लान लागू हो
इस मामले में कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि नगर निगम आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियों पर कार्रवाई कर रहा है। चूंकि, भोपाल में पिछले 20 साल से मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ। इसमें व्यापारियों की क्या गलती है? सरकार जल्द ही मास्टर प्लान लागू करेंगे। इसकी हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री की मीटिंग से पहले रविवार को अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावडियाकलां समेत कई इलाकों में आवासीय परिसरों में कमर्शियल एक्टिविटी के विरोध में रहवासी सडक़ पर उतरे थे। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के तत्वाधान में रहवासियों ने पैदल मार्च भी निकाला था। जिसमें लोगों ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। इस मामले में भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) मैदान में उतरा है। संगठन ने व्यापारियों के हित में मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल और सचिव अजय देवनानी ने बताया कि भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था। इसके बाद नया मास्टर प्लान आज तक लागू नहीं हुआ है। इस वजह से शहर के अनेक क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों के अनुरूप पर्याप्त कमर्शियल भूखंड उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। ऐसी परिस्थितियों में 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी, 11-12 नंबर मार्केट, 1100 क्वार्टर्स, सहयोग विहार, बावडय़िाकलां, रोहित नगर सहित नए भोपाल के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर हजारों व्यापारी वर्षों से आवासीय भूखंडों से ही अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में अस्पताल, बैंक, क्लीनिक, शोरूम एवं अन्य सेवा प्रदाता संस्थान वर्षों से संचालित होकर नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि सभी व्यवसायी नियमित रूप से नगर निगम को व्यावसायिक दर से संपत्ति कर, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी को कमर्शियल दर से विद्युत शुल्क और शासन द्वारा निर्धारित अन्य समस्त करों एवं शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपए का नियमित राजस्व प्राप्त हो रहा है।

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