झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर चल रहा युवाओं का संग्राम अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की जिद के बीच आखिरकार देश के जाने-माने शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दखल देना पड़ा। वांगचुक के एक खास फोन कॉल ने रांची के इस पूरे आंदोलन की दिशा तय कर दी है, जिसके बाद अनशनकारी देवेंद्र ने एक अहम फैसला लिया है।
सोनम वांगचुक ने फोन पर दी गांधी जी की मिसाल
जेएलकेएम के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से अन्न-जल त्यागकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी अटल जिद थी कि जब तक सोनम वांगचुक खुद रांची आकर उनसे मुलाकात नहीं करते, तब तक वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे। आंदोलनकारी की बिगड़ती सेहत और गंभीरता को देखते हुए सोनम वांगचुक ने खुद देवेंद्र महतो से फोन पर सीधा संपर्क साधा। बातचीत के दौरान वांगचुक ने उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए समझाया कि अनशन का असली मकसद खुद को शारीरिक नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि गहरी नींद में सोई हुई सत्ता और अंधी सरकार को जगाना होता है। उन्होंने महतो से अपनी सेहत का ध्यान रखने की अपील करते हुए तुरंत शहद और नींबू पानी लेने का आग्रह किया।
रांची आने का मिला पक्का आश्वासन, तब जाकर पिया पानी
फोन पर हुई इस लंबी बातचीत के दौरान देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने अपनी यह दिली ख्वाहिश भी जाहिर की कि वह वांगचुक की मौजूदगी में ही अपना जल ग्रहण करना चाहते हैं। देवेंद्र के इस अटूट विश्वास को देखते हुए वांगचुक ने उन्हें पक्का आश्वासन दिया कि वे जल्द ही इस छात्र आंदोलन का खुला समर्थन करने के लिए खुद रांची पहुंचेंगे। वांगचुक ने बड़े ही प्यार से समझाया कि अगर शरीर में पानी और नमक की कमी हो गई, तो इस लंबी लड़ाई में टिक पाना असंभव हो जाएगा। उनके लगातार समझाने और रांची आने के वादे के बाद आखिरकार देवेंद्र महतो का दिल पसीज गया और उन्होंने पानी ग्रहण कर लिया।
परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ डटे हैं हजारों परीक्षार्थी
आपको बता दें कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में यह पूरा धरना-प्रदर्शन जेपीएससी, जेएसएससी, सीजीएल समेत राज्य स्तरीय अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित बड़े पैमाने की धांधली और अनियमितताओं के विरोध में चल रहा है। प्रदेश भर के हजारों परीक्षार्थी अपने भविष्य को बचाने के लिए कड़ाके की धूप और बारिश के बीच लंबे समय से यहां डटे हुए हैं और सरकार से पारदर्शी जांच की गुहार लगा रहे हैं। अब इस ऐतिहासिक आंदोलन में सोनम वांगचुक का नैतिक समर्थन मिलने के बाद मैदान में डटे छात्रों का हौसला और भी ज्यादा बुलंद हो गया है।








