मॉनसून एक्टिव, कई राज्यों में भारी बारिश के आसार, सामान्य से 12 प्रतिशत कम हुई वर्षा

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नई दिल्ली,(आरएनएस)। देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में मानसून फिलहाल सक्रिय बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्र, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा होने की संभावना है, जबकि मध्य और पश्चिम भारत में वर्षा की गतिविधियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते मानसूनी स्वरूप और जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का वितरण लगातार असमान होता जा रहा है।मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश में एक जून से तीन अगस्त के बीच 416.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 472.6 मिलीमीटर होती है। इस प्रकार देश में अब तक लगभग 12 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।देश के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, 16 राज्यों में सामान्य वर्षा दर्ज की गई है, जबकि चार राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। वर्षा के असमान वितरण के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, वहीं कई हिस्से अब भी सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगले तीन दिनों तक कुछ स्थानों पर भारी वर्षा का अनुमान जताया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले छह दिनों तक भारी वर्षा हो सकती है।
पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले चार दिनों तक भारी वर्षा की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में भी अगले तीन दिनों के दौरान तेज वर्षा होने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार नया पश्चिमी विक्षोभ तथा मानसून द्रोणी (मानसून ट्रफ) की बदलती स्थिति के कारण उत्तर भारत में वर्षा की गतिविधियां तेज बनी रहेंगी। वर्तमान में मानसून द्रोणी बीकानेर से दिल्ली, लखनऊ और पटना होते हुए मणिपुर तक फैली हुई है, जिससे वर्षा प्रणाली हिमालय की तलहटी की ओर सक्रिय हो रही है।
पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा और झारखंड में अगले छह दिनों तक भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। बिहार में अगले तीन दिनों तक तेज वर्षा हो सकती है।
बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में गरज-चमक, आकाशीय बिजली तथा तेज हवाओं के साथ वर्षा होने की आशंका है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और आवश्यक सावधानी बरतें।
पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढक़र 87 हो गई है। राज्य के सात जिलों में एक लाख 28 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। शिवसागर जिले से दो और लोगों की मौत की सूचना मिली है।
मौसम विभाग ने असम, मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी तेज वर्षा की संभावना है, जिससे बाढ़, भूस्खलन और जलभराव का खतरा बढ़ गया है।
केरल में लगातार हो रही भारी वर्षा का असर जनजीवन पर पड़ रहा है। मलप्पुरम जिले में भूस्खलन के कारण नादुकनी-परप्पनंगडी राज्य राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया है। कई जिलों में मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई है। तटीय कर्नाटक, केरल और माहे में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा का अनुमान है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त के आगे बढऩे के साथ मध्य भारत, पश्चिम भारत तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं। मौसम संबंधी आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि वर्षा का मुख्य क्षेत्र उत्तर और पूर्वी भारत की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जिससे पूरे देश में वर्षा का वितरण और अधिक असमान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो का प्रभाव मानसून के दूसरे चरण में और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। इससे उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा सक्रिय रह सकती है, जबकि मध्य और पश्चिम भारत में वर्षा में कमी आने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में वर्षा का उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत की ओर झुकाव अल्पकालिक मौसम प्रणालियों का परिणाम तो है ही, साथ ही यह बदलते मानसून के दीर्घकालिक रुझान का भी संकेत है। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कहीं अत्यधिक वर्षा हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रहती है।
पर्यावरणविद् राजेश पॉल के अनुसार एल नीनो के प्रभाव से विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा का असंतुलन और बढ़ सकता है। जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर यह स्थिति मानसून को और अधिक अनिश्चित बना सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी तथा अन्य क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढऩे की आशंका है।
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