मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है. अमेरिका ने शुक्रवार तक लगातार 13वीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए, लेकिन 14वीं रात यानी शनिवार को अमेरिकी की ओर से कोई हमला नहीं किया गया. हालांकि इस बीच यूक्रेन ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कैस्पियन सागर में एक ईरानी जहाज पर हमला कर दिया. इस हमले में कम से कम एक नाविक की मौत हो गई. जबकि कई लोग घायल हुए हैं. इस हमले के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए यूक्रेन के राजनयिक को तलब किया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर यूक्रेन के हमले की निंदा की. मंत्रालय ने कहा कि इस हमले में हुए धमाके से एक नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया. बता दें कि यूक्रेन युद्ध के दौरान, कीव को मॉस्को द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईरान में बने ड्रोन का सामना करना पड़ रहा है. कीव ने मध्य पूर्व के उन देशों को ड्रोन को रोकने की अपनी विशेषज्ञता देने की पेशकश की है, जिन पर ईरान ने हमले किए हैं.
तेहरान ने अपने पोत पर हुए हमले को आक्रामकता का कृत्य बताया और कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा करेगा, साथ ही कीव पर यूक्रेन में युद्ध को विस्तार देने का आरोप लगाया.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय ने तेहरान में यूक्रेन के चार्ज डीअफेयर्स को तलब कर इस हमले पर अपना विरोध जताया, जिसे उसने शत्रुतापूर्ण और आपराधिक हमला बताया.
यूक्रेन का आरोप है कि इस जंग में रूस ईरान की मदद कर रहा है. ईरान की निंदा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जलेंस्की की उस टिप्पणी के साथ आई है. जिसमें उन्होंने कहा था कि कीव ने पाया है कि रूस मध्य पूर्व में अपने उपग्रह अवलोकन ईरान को दे रहा है ताकि ईरान इस क्षेत्र में हमले निर्देशित कर सके.
यूक्रेनी राष्ट्रपति जलेंस्की ने पहले कहा था कि यूक्रेन की सेना ने कैस्पियन सागर में रूस के एक युद्धपोत और ईरान से जुड़े मिलिट्री सामान को ले जाने वाले जहाजों पर हमला किया था.
हालांकि बाद में उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कीव ने जुलाई की शुरुआत से ही खाड़ी देशों और वहां मौजूद अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों पर रूस की सक्रिय सैटेलाइट निगरानी देखी है. ये तस्वीरें बाद में ईरान में दिखाई देती हैं.
जेलेंस्की ने कहा, साथ ही, इन जगहों की रूस की सैटेलाइट तस्वीरों और ईरान के हमलों के बीच साफ संबंध है हमले से पहले उनकी तैयारी के दौरान और हमले के बाद हुए नुकसान का आकलन करने के लिए भी.
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले करीब पांच महीनों से जंग जारी है. इस जंग की शुरुआत 28 फरवरी को तब हुई, जब इजरायल और अमेरिका ने एक साथ मिलकर ईरान पर हवाई हमला कर दिया.








