संसद में पहले ही दिन भारी हंगामा, नहीं चल सकी राज्यसभा, कार्यवाही 6 बार स्थगित

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नई दिल्ली(आरएनएस)। सोमवार को संसद के मानसून सत्र का पहला दिन था। हालांकि पहले ही दिन संसद में सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिली। संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामा होता और कार्यवाही स्थगित होती रही। कुल 6 बार राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इसके बावजूद भी हंगामे की स्थिति बनी रही और राज्यसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। सोमवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने राज्यसभा में नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक मामले का विषय उठाया। खडग़े ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। खडग़े ने पेपर लीक और नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि देशभर के लाखों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। खडगे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर वहां एकत्र हुए हैं। खडग़े ने कहा कि इन छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दा है। खडग़े के वक्तव्य के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। दोनों पक्षों के सदस्य अपनी-अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते हंगामा बढ़ गया और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने हंगामा जारी रहने पर राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 12 बजे कार्यवाही प्रारंभ होने पर हंगामा भी शुरू हो गया। विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे और अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए। इस पर राज्यसभा की कार्यवाही साढ़े बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि साढ़े बारह बजे भी यही स्थिति बनी रही। इस पर सदन की कार्यवाही को पहले 12 बजकर 50 मिनट और फिर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
दोपहर 2 बजे भी सदन में यही हुआ और कार्यवाही 2 बजकर 30 मिनट तक स्थगित कर दी गई। 2 बजकर 30 मिनट पर भी सदन में हंगामा जारी रहा और राज्यसभा की कार्यवाही को मंगलवार सुबह तक स्थगित कर दिया गया। इससे पहले सत्र के पहले दिन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को संबोधित करते हुए नव-निर्वाचित सदस्यों का स्वागत किया और सभी सांसदों से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने तथा सदन की गरिमा एवं मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया।
सभापति ने कहा कि राज्यसभा की हमेशा से सार्थक और गंभीर विचार-विमर्श की गौरवशाली परंपरा रही है, और उन्हें विश्वास है कि यह सत्र भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा तथा निर्णय के लिए उपलब्ध इस बहुमूल्य समय का सदुपयोग करना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सभापति ने बताया कि इस सत्र से राज्यसभा सचिवालय ने सदन की कार्यवाही के लिए एआई-आधारित तात्कालिक अनुवाद सुविधा शुरू की है। यह सुविधा फिलहाल नौ भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है और सदस्यों की सीटों पर स्थापित मल्टीमीडिया उपकरणों के माध्यम से इसका उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस व्यवस्था का विस्तार संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं तक किया जाएगा। साथ ही, सदस्यों से आग्रह किया कि वे इस नई सुविधा के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया दें ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके।
सभापति ने कहा कि यह सत्र विधायी और विचार-विमर्श संबंधी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे सदन के कामकाज को समय पर पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि हर व्यवधान उन मुद्दों पर चर्चा को प्रभावित करता है जो देश और जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं। संसद जनता की आकांक्षाओं की प्रतिनिधि संस्था है और सदन में उपलब्ध समय का उपयोग जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा के लिए होना चाहिए।

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