एयर इंडिया विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अक्टूबर तक संभव, एएआईबी ने कॉकपिट रिकॉर्डिंग मांगने का विरोध किया

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मीडिया अटकलों को बताया जांच में बाधा
नई दिल्ली,(आरएनएस)। पिछले वर्ष अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच कर रहे विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट का मसौदा अक्टूबर तक तैयार होने की संभावना है। ब्यूरो ने स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि जांच निर्धारित कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जा रही है तथा इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। एएआईबी ने यह जवाबी हलफनामा विमान के पायलट रहे दिवंगत कैप्टन सुमित सभरवाल के पिता पुष्करराज सभरवाल की याचिका के जवाब में दायर किया है। याचिकाकर्ता ने दुर्घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।हलफनामे में ब्यूरो ने बताया कि जांचकर्ता वर्तमान में साक्ष्य संकलन, तकनीकी परीक्षण और न्यायालयिक वैज्ञानिक (फोरेंसिक) जांच के अंतिम चरण में हैं। संभावना है कि जांच अगले छह सप्ताह में पूरी हो जाएगी। इसके बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि दुर्घटना कैसे हुई, क्यों हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे।
एएआईबी ने न्यायालय को बताया कि मीडिया में चल रही अटकलें तथा पायलटों को दोषी ठहराने वाली खबरें जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं। ब्यूरो के अनुसार, इससे कुछ गवाह खुलकर बयान देने से हिचक रहे हैं, जिससे जांच को नुकसान पहुंच रहा है।
ब्यूरो ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग का भी विरोध किया। हलफनामे में कहा गया कि नियम 17(1) के तहत, जब तक केंद्र सरकार कोई अलग निर्णय नहीं लेती, कॉकपिट की आवाज रिकॉर्डिंग, उसका प्रतिलेख, विमान में रिकॉर्ड हुए दृश्य, हवाई यातायात नियंत्रण इकाई की रिकॉर्डिंग, जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान तथा विमान संचालन से जुड़े व्यक्तियों की निजी एवं चिकित्सकीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में पुष्करराज सभरवाल के अलावा भारतीय पायलट महासंघ भी पक्षकार है। याचिकाकर्ताओं ने दुर्घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है।
इस मांग का विरोध करते हुए एएआईबी ने कहा कि जांच विमान दुर्घटनाओं से संबंधित वैधानिक प्रावधानों तथा अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के अनुरूप की जा रही है। ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति पर दोषारोपण करना या नागरिक अथवा आपराधिक दायित्व तय करना नहीं, बल्कि विमानन सुरक्षा को मजबूत करना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।
ब्यूरो ने बताया कि जांच शिकागो अभिसमय तथा अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के अनुबंध-13 के प्रावधानों के अनुसार संचालित की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की उड़ान एआई-171 उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मृत्यु हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोगों की भी जान चली गई। मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।
इस दुर्घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो को सौंपी गई थी। ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट पर विभिन्न पक्षों द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद अब सभी की निगाहें अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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